एमटी सेट्टेबेलो पर हमले को लेकर भारत ने अमेरिका के समक्ष दर्ज कराया कड़ा विरोध, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई चिंता

ओमान तट के पास तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो (M/T Settebello) पर हुए हमले के बाद भारत ने अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की कार्रवाई में भारतीय नाविकों के हताहत होने की घटना पर भारत सरकार ने गहरी चिंता व्यक्त की है।

यह घटना उस समय हुई जब पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो ओमान के तट के निकट से गुजर रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जहाज पर इसलिए कार्रवाई की गई क्योंकि वह कथित तौर पर ईरान से तेल ले जाने के दौरान लागू नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। CENTCOM ने दावा किया कि जहाज के इंजन कक्ष को सटीक हथियारों (प्रिसिजन म्यूनिशंस) से निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय किया गया।

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत (चार्ज डी’अफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर भारत की गंभीर चिंताओं से अमेरिकी पक्ष को अवगत कराया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि भारत अपने विशाल समुद्री समुदाय के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा, “दुनिया भर में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं। फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में भी बड़ी संख्या में भारतीय नाविक मौजूद हैं। उनके हितों की रक्षा के लिए हमारे दूतावास और नौवहन मंत्रालय लगातार संपर्क में हैं।”

जायसवाल ने कहा कि एमटी सेट्टेबेलो पर हमले के बाद भारत ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा, “हमने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया और जारी हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। साथ ही इस घटना के खिलाफ मजबूत विरोध भी दर्ज कराया।” उन्होंने कहा कि भारत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा क्षेत्र में हो रहे ऐसे हमले तत्काल बंद होने चाहिए।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने क्षेत्रीय तनाव के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को ही सबसे प्रभावी रास्ता बताया है। उन्होंने कहा, “हमने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे का मार्ग है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।”

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत ओमान तट के पास वाणिज्यिक पोत सेट्टेबेलो पर हुए हमले की निंदा करता है। मंत्रालय के अनुसार, जहाज पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को अब तक सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बयान में कहा गया कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और खोज एवं बचाव अभियान के लिए ओमानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में जहाजों पर लगातार हो रहे हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और यह क्षेत्रीय संघर्ष का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। भारत ने तनाव तत्काल कम करने, कूटनीतिक समाधान खोजने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन बहाल करने की आवश्यकता दोहराई।

वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसकी सेनाओं ने ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर को निष्क्रिय किया, क्योंकि वह कथित तौर पर ईरान से तेल ले जाकर लागू नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। CENTCOM के अनुसार, चालक दल को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन अनुपालन नहीं होने पर जहाज के इंजन कक्ष को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि 13 अप्रैल से शुरू हुई नाकेबंदी के बाद अब तक आठ नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को निष्क्रिय किया गया है, 134 जहाजों का मार्ग बदला गया है और 42 मानवीय सहायता पोतों को गुजरने की अनुमति दी गई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि 9 जून की रात 11:14 बजे ओमान की खाड़ी से गुजर रहे पलाऊ-ध्वज वाले एमटी सेट्टेबेलो को निष्क्रिय किया गया। CENTCOM का कहना है कि यह लगातार दूसरे दिन की गई ऐसी कार्रवाई थी। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही भारत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित नौवहन की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।