मानसिक स्वास्थ्य आज वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, लेकिन भारत ने टेली-मानस और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी पहलों के ज़रिए उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक मानसिक रूप से स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जागरूकता बढ़ाने, कार्यबल प्रशिक्षण को सशक्त बनाने और डिजिटल समाधानों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार, भारत में लगभग 10.6 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य विकार से प्रभावित हैं। वहीं, निम्हान्स के 2019 के अध्ययन में पाया गया कि मानसिक बीमारियाँ महिलाओं (20%) में पुरुषों (10%) की तुलना में अधिक पाई जाती हैं — विशेष रूप से डिप्रेशन, एंग्जायटी और सोमैटिक कंप्लेंट्स जैसी स्थितियाँ।
भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को समग्र कल्याण का अभिन्न हिस्सा मानते हुए इसे आयुष्मान भारत के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया है। अब देशभर में 1.75 लाख से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया है, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अलावा, आयुष्मान भारत पीएम-जय योजना के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य उपचार को प्रति परिवार 5 लाख रुपये के वार्षिक बीमा कवरेज में शामिल किया गया है। वहीं महामारी के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24×7 राष्ट्रीय हेल्पलाइन (080-4611 0007) शुरू की थी, ताकि तनाव और चिंता से जूझ रहे लोगों को तत्काल परामर्श मिल सके।
-(इनपुटःएजेंसी)


