‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’ (TERI) में इलेक्ट्रिसिटी और रिन्यूएबल्स डिवीजन के फेलो एवं डायरेक्टर लेख्य दत्ता ने कहा है कि भारत को स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक वाले देशों के साथ रणनीतिक सहयोग की सख्त जरूरत है। साथ ही, देश को उन जगहों की रणनीतिक पहचान करनी चाहिए जहां भरोसेमंद और हाई-लोड बिजली की मांग ज्यादा हो, खासकर इंडस्ट्रियल सेक्टर और डेटा सेंटर्स के लिए। BNEF समिट के दौरान दत्ता ने कहा, “हमें उन देशों के साथ सहयोग करने की रणनीति बनानी होगी जिनके पास SMR तकनीक है। इंडस्ट्रियल सेक्टर और डेटा सेंटर्स वाले क्षेत्रों पर फोकस करना होगा। राज्य को रणनीतिक तरीके से उन जगहों को खोलना होगा जहां भरोसेमंद, हाई-फ्रीक्वेंसी या हाई-लोड बिजली की जरूरत है। वहां स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर अहम भूमिका निभा सकता है।”
नेट-जीरो लक्ष्य में न्यूक्लियर और हाइड्रो का महत्व
दत्ता ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, न्यूक्लियर पावर और हाइड्रोपावर की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। उन्होंने बताया, “अगर हम थर्मल पावर से हटते हैं तो न्यूक्लियर और हाइड्रोपावर बड़ी भूमिका निभाएंगे। 2070 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें SMR और हाइड्रोपावर को बढ़ावा देने के लिए और अधिक तकनीक की जरूरत होगी।”
SHANTI बिल और प्राइवेट सेक्टर की भूमिका
SMR विकास पर दत्ता ने नए ड्राफ्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि SHANTI बिल के तहत नया रेगुलेशन ड्राफ्ट किया गया है, जो पब्लिक कमेंट्स के लिए उपलब्ध है। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) ने ड्राफ्ट SHANTI रूल्स और रेगुलेशंस पर स्टेकहोल्डर्स, उद्योग, संस्थानों, विशेषज्ञों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं। फीडबैक जमा करने की अंतिम तारीख 4 सितंबर 2026 है। दत्ता ने कहा कि नए फ्रेमवर्क के तहत प्राइवेट सेक्टर का निवेश भी आएगा। उन्होंने जोर दिया कि SMRs के विकास में सामाजिक और कम्युनिटी से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखना जरूरी है।
डेटा सेंटर्स की चुनौतियां और सस्टेनेबल फ्रेमवर्क
तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर सेक्टर पर दत्ता ने कहा कि ये सुविधाएं स्थानीय स्तर पर चुनौतियां पैदा कर सकती हैं क्योंकि इन्हें बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। बिजली की बदलती मांग डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर्स के असर का आकलन सिर्फ निवेश के नजरिए से नहीं, बल्कि स्थानीय कम्युनिटी के नजरिए से भी होना चाहिए। TERI पावर मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के साथ मिलकर सस्टेनेबल डेटा सेंटर्स के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। इसमें कम्युनिटी भागीदारी, बिजली और पानी की जरूरत को स्थानीय स्तर पर ध्यान में रखा जा रहा है।
एनर्जी स्टोरेज और विकल्पों का पोर्टफोलियो
दत्ता ने रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने के साथ एनर्जी स्टोरेज के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टोरेज से रिन्यूएबल पावर को बिजली सिस्टम में आसानी से जोड़ा जा सकेगा। इथेनॉल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर उन्होंने कहा कि भारत को किफायती होने का ध्यान रखते हुए ऊर्जा के विभिन्न विकल्पों का पोर्टफोलियो बनाना होगा। सभी विकल्प जरूरी हैं, लेकिन सस्ता होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। (इनपुट-एजेंसी)


