प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक मील का पत्थर
डच विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसन ने भारत और नीदरलैंड के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध व्यापार, नवाचार और लोगों के बीच मजबूत संपर्कों पर आधारित हैं। उन्होंने हाल ही में घोषित भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी को दोनों देशों के रिश्तों में एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया।
पीएम मोदी की यात्रा के दौरान अहम बातचीत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्हें टॉम बेरेन्डसन से दोबारा मिलकर खुशी हुई और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिला। यह बैठक उस समय हुई जब द हेग में भारत और नीदरलैंड ने अपने संबंधों को आधिकारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर अपग्रेड किया।
व्यापार, रक्षा और तकनीक में सहयोग पर सहमति
दोनों देशों ने संयुक्त बयान में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इनमें व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, नवाचार, जल प्रबंधन, कृषि और शिक्षा शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण
दोनों पक्षों ने एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और नौवहन की स्वतंत्रता के सम्मान की बात कही। नीदरलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के साथ क्षमता निर्माण एवं संसाधन साझाकरण पिलर का सह-नेतृत्व करने की घोषणा की।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर चर्चा
बैठक में यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने मानवीय और आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई और शांति के लिए बातचीत व कूटनीति का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
दोनों देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निर्बाध वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। साथ ही व्यापार और ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों का विरोध किया। प्रधानमंत्री मोदी ने डच प्रधानमंत्री को भारत आने का निमंत्रण भी दिया और उनकी मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया। (इनपुट: एजेंसी)


