भारत ने तीसरे संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन से पहले आयोजित की दूसरी ‘ब्लू टॉक्स’ बैठक, समुद्री सहयोग को बढ़ावा

तीसरे संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (UNOC3) के तैयारी के तहत भारत ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पृथ्वी भवन में “दूसरी ब्लू टॉक्स” बैठक का सफल आयोजन किया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), फ्रांस और कोस्टा रिका के दूतावासों के सहयोग से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक समुद्री सहयोग को सशक्त बनाना और महासागर संरक्षण से जुड़े सतत विकास लक्ष्य (SDG 14) को प्राप्त करने की दिशा में गति देना था। इस आयोजन को आगामी 9 से 13 जून 2025 के बीच नीस, फ्रांस में प्रस्तावित UNOC3 सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले पहली ब्लू टॉक्स बैठक फरवरी 2024 में आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता MoES के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने की, जबकि कोस्टा रिका के भारत में राजदूत नेस्टर बाल्टोडानो वर्गास और फ्रांसीसी दूतावास के उप मिशन प्रमुख डेमियन सईद सह-अध्यक्ष रहे। डॉ. रविचंद्रन ने अपने उद्घाटन भाषण में महासागर संसाधनों के वैज्ञानिक मानचित्रण, नवीन तकनीकों के विकास, नीति-आधारित हस्तक्षेप और समुद्री मानव संसाधनों के सशक्तिकरण पर जोर दिया। राजदूत वर्गास ने इस बैठक को भारत और कोस्टा रिका के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने वाला कदम बताया।

इस अवसर पर मंत्रालय द्वारा “Transforming India’s Blue Economy: Investment, Innovation and Sustainable Growth” नामक शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया गया, जो भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति का व्यापक खाका प्रस्तुत करता है। यह रिपोर्ट देश की समुद्री शक्ति का लाभ उठाकर सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, नीति समन्वय को मजबूत करने और निजी निवेश आकर्षित करने की दिशा में सरकार की योजनाओं को उजागर करती है। यह रिपोर्ट भारत की G20 अध्यक्षता और ‘विकसित भारत 2047’ विजन से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को भी दर्शाती है।

श्वेत पत्र में यह भी बताया गया कि केंद्र के 25 मंत्रालय, तटीय राज्य और केंद्रशासित प्रदेश मिलकर ब्लू इकोनॉमी के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि इसमें सीमित डेटा साझाकरण, निजी निवेश की कमी और तकनीकी अंतर जैसी प्रमुख चुनौतियों को भी उजागर किया गया है। रिपोर्ट में कई प्रेरणादायक मॉडल जैसे-महिलाओं द्वारा संचालित समुद्री शैवाल खेती, स्मार्ट बंदरगाहों का विकास और हरित जहाज पुनर्चक्रण भी शामिल किए गए हैं। बैठक के दौरान चार प्रमुख विषयों-(1) समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण व पुनर्स्थापन, (2) समुद्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा का विस्तार, (3) स्थलीय स्रोतों से समुद्री प्रदूषण की रोकथाम, (4) महासागर, जलवायु और जैव विविधता के परस्पर संबंधों का समन्वय पर आधारित संवाद आयोजित हुए। डिप्टी हेड ऑफ मिशन डेमियन सईद ने BBNJ समझौते की दिशा में भारत की प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि UNOC3 से पहले यह विचार-विमर्श अत्यंत आवश्यक है।

दूसरी ब्लू टॉक्स बैठक ने बहुपक्षीय संवाद और समुद्री नीति निर्माण में सहयोग की भावना को और मजबूत किया। इस आयोजन ने न केवल भारत की वैश्विक समुद्री नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ किया, बल्कि महासागर संरक्षण की दिशा में ठोस और दीर्घकालिक समाधान खोजने की प्रक्रिया को भी नया आयाम दिया।-(PIB)