वित्त वर्ष 2025-26 में इंडिया पोस्ट का कुल राजस्व बढ़कर 15,373 करोड़ रुपए हो गया है। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने विभाग के व्यापक परिवर्तन एजेंडा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इंडिया पोस्ट तेजी से आधुनिक, ग्राहक-केंद्रित और डिजिटल सेवा नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहा है।
पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में 70% की वृद्धि
डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने बताया कि पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में 70% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग ने इस क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपए की संभावित राजस्व क्षमता का आकलन किया है। सरकार का लक्ष्य इंडिया पोस्ट को देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स और सेवा प्रदाता नेटवर्क के रूप में स्थापित करना है।
डिजिटल डाक सेवाओं के लिए 5,800 करोड़ रुपए का निवेश
निर्बाध डिजिटल डाक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इंडिया पोस्ट द्वारा आईटी 2.0 परियोजना के तहत 5,800 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य डाक सेवाओं को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम, पारदर्शी और तेज बनाना है, ताकि ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
डीबीटी और सुकन्या समृद्धि योजना में बड़ी उपलब्धि
इंडिया पोस्ट ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 45,000 करोड़ रुपए वितरित किए हैं। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 3.8 करोड़ लड़कियों का नामांकन किया गया है। सरकार का मानना है कि डाक नेटवर्क वित्तीय समावेशन और सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कर्मचारियों के प्रशिक्षण और मानसिकता बदलाव पर जोर
संपर्क, सेवा वितरण और बिक्री कौशल को मजबूत करने के लिए प्रत्येक 100 कर्मचारियों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि विभाग का परिवर्तन केवल तकनीकी हस्तक्षेप तक सीमित नहीं है, बल्कि लेन-देन आधारित व्यवस्था से ग्राहक-केंद्रित सोच की ओर बढ़ना भी उतना ही आवश्यक है। देशभर में ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन आयोजित किए गए, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों को सीधे जोड़ा जा सके। इन सम्मेलनों में विभाग की वित्तीय स्थिति, योजनाओं और विकसित भारत के विजन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे डाकघर
इंडिया पोस्ट अपने डाकघर नेटवर्क का बड़े स्तर पर भौतिक आधुनिकीकरण भी कर रहा है। शहरी डाकघरों के नवीनीकरण पर प्रत्येक कार्यालय में 60 से 70 लाख रुपए तक निवेश किया जा रहा है। इन डाकघरों में डिजिटल काउंटर, सुव्यवस्थित आधार अपडेट सेवाएं और साझा कार्यस्थल जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विश्वविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आधुनिक डाकघर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें सांस्कृतिक तत्वों के साथ डिजिटल सुविधाएं भी शामिल हैं, ताकि युवाओं के साथ बेहतर जुड़ाव स्थापित किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पहुंच सुनिश्चित करने, लोगों को सरकारी योजनाओं में नामांकित करने और डाक वित्तीय सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


