भारत दुनिया में नारियल उत्पादन में सबसे आगे, वैश्विक कुल उत्पादन में 31.24% की हिस्सेदारी

भारत दुनिया में नारियल उत्पादन में पहले और खेती के रकबे (क्षेत्रफल) के मामले में तीसरे स्थान पर है। मंगलवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, वैश्विक कुल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 31.24 प्रतिशत और खेती के रकबे में 17.90 प्रतिशत है। साथ ही, 2025-26 के दौरान कई राज्यों में लगभग 2,175 हेक्टेयर नया क्षेत्र नारियल की खेती के दायरे में लाया गया। भारत ने 2024-25 के दौरान 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन किया, जिसमें प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता 9,249 नारियल रही।

वित्तीय सहायता और किसानों को लाभ

2025-26 में बागानों की स्थापना और रखरखाव के लिए 632.77 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिली। 2024-25 के दौरान नारियल की नई खेती के तहत अतिरिक्त 2,979 हेक्टेयर क्षेत्र लाने के लिए लगभग 209.24 लाख रुपये का उपयोग किया गया। बयान में कहा गया है कि इस पहल से देश के विभिन्न राज्यों में 13,068 किसानों को लाभ हुआ।

राज्यों का प्रदर्शन

देश के भीतर, केरल में नारियल की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो लगभग 7.54 लाख हेक्टेयर में फैला है और यहां लगभग 5,149.87 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है। नारियल उत्पादन में तमिलनाडु सबसे आगे है, जबकि आंध्र प्रदेश में उत्पादकता सबसे अधिक है; इसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का स्थान आता है।

निर्यात और वैल्यू एडिशन

भारत का निर्यात दायरा पारंपरिक उत्पादों से बढ़कर वर्जिन कोकोनट ऑयल यानी शुद्ध नारियल तेल, नारियल का दूध और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे वैल्यू-एडेड (मूल्य-वर्धित) उत्पादों तक फैल गया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक नारियल-संबंधी निर्यात में 2 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 21 ट्रिलियन डॉलर हासिल करना है।

सरकारी योजनाएं और नीतिगत समर्थन

सरकार, मुख्य रूप से नारियल विकास बोर्ड (कोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड – सीडीबी) के माध्यम से, नारियल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू करती है। बयान में बताया गया कि 2025-26 में सीडीबी की गतिविधियों के लिए 147.21 करोड़ रुपये जारी किए गए।

केंद्रीय बजट 2026-27 में स्थिरता, निर्यात और किसानों की आय को मजबूत करने के लिए ‘नारियल संवर्धन योजना’ (कोकोनट प्रमोशन स्कीम) भी शुरू की गई। बयान में कहा गया है कि लगातार मिल रहे पॉलिसी सपोर्ट से भारत का नारियल सेक्टर प्रोडक्शन, वैल्यू एडिशन, एक्सपोर्ट और आजीविका के मामले में लगातार आगे बढ़ रहा है।

नारियल सेक्टर के लिए सरकार की कई तरह की पॉलिसी में कोपरा के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी), खास डेवलपमेंट स्कीमें और पूरी वैल्यू चेन में स्किल डेवलपमेंट तथा एंटरप्राइज बनाने के लिए खास पहल शामिल हैं। कोपरा, यानी नारियल का सूखा गूदा, उन 22 तय एग्रीकल्चरल फसलों में से एक है जो मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) सिस्टम के दायरे में आती हैं। (इनपुट-एजेंसी)

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