वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत 131वें स्थान पर बरकरार, आइसलैंड पहले पायदान पर

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से बुधवार को जारी वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2026 में भारत 131वें स्थान पर बरकरार रहा, जबकि आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे क्रमशः शीर्ष तीन स्थान पर हैं। कुल 145 देशों की सूची में भारत से नीचे 14 देश हैं। चाड सबसे निचले पायदान पर है, जबकि ईरान और पाकिस्तान भी सबसे निचले तीन देशों में शामिल हैं।

भारत से नीचे 14 देश, आइसलैंड शीर्ष पर

भारत से नीचे पापुआ न्यू गिनी, कुवैत, ओमान, कतर, ताजिकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र, मोरक्को, माली, अल्जीरिया और कांगो समेत 14 देश हैं। शीर्ष 10 देशों में आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, नामीबिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और आयरलैंड शामिल हैं। नामीबिया चार पायदान ऊपर चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंचा है और उप-सहारा अफ्रीका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला देश बन गया है। ऑस्ट्रेलिया पहली बार शीर्ष 10 में शामिल हुआ है।

वैश्विक लैंगिक अंतराल 69.2% तक कम

जिनेवा स्थित डब्ल्यूईएफ ने कहा कि 2006 से इस सूचकांक में शामिल लगभग हर अर्थव्यवस्था ने लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति की है। हालांकि, पूरी समानता हासिल करने में अभी भी 120 साल लगने का अनुमान है। डब्ल्यूईएफ के अनुसार, दुनिया भर में लैंगिक अंतराल 69.2% तक कम हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है। सूचकांक में 100% को पूर्ण समानता माना जाता है।

भारत का लैंगिक समानता स्कोर 64.5%

दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति 64.5% रही, जो वैश्विक औसत से कम है। पिछले साल की तुलना में भारत के स्कोर में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन उसकी वैश्विक रैंकिंग 131वें स्थान पर ही बनी रही। कुल मिलाकर 2006 के बाद से भारत में लैंगिक समानता में 4.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण शिक्षा के स्तर में सुधार रहा है।

आर्थिक भागीदारी और अवसर का स्कोर 41.2%

आर्थिक भागीदारी एवं अवसर उप सूचकांक में भारत का समानता स्कोर 41.2% रहा। यह पिछले संस्करण से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है, लेकिन 2013 में दर्ज सबसे अच्छे परिणाम से 3.5 प्रतिशत अंक कम है। पेशेवर और तकनीकी कामगारों के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण भारत में लैंगिक समानता 2006 के 26.6% से बढ़कर 2026 में 49.9% हो गई।

वरिष्ठ पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम

वर्ष 2006 के बाद से जन प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों के बीच महिलाओं के प्रतिनिधित्व में 10 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है, लेकिन 2026 में यह 13.1% के साथ तुलनात्मक रूप से कम रहा। पिछले दो दशकों में श्रमिक कार्यबल में भागीदारी की समानता में मामूली सुधार हुआ और 2026 में यह 44.1% रही।

शिक्षा में समानता का स्कोर 96.6%

शिक्षा के स्तर वाले उप सूचकांक में भारत का समानता स्कोर 96.6% रहा, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसमें 0.5 प्रतिशत अंक की गिरावट आई। स्वास्थ्य और जीवन रक्षा के मामले में भारत ने पिछले साल के मुकाबले अपना स्कोर बेहतर किया और 95.6% समानता के स्तर तक पहुंच गया। वर्ष 2017 से सुधार के बावजूद 2026 में जन्म के समय भारत का लिंगानुपात 2006 की तुलना में लगभग एक प्रतिशत अंक कम रहा।

राजनीतिक सशक्तीकरण में भारत का प्रदर्शन बेहतर

वर्ष 2026 में भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन राजनीतिक सशक्तीकरण उप सूचकांक में रहा। इसमें लैंगिक अंतराल को 24.5% तक कम किया गया और भारत को वैश्विक स्तर पर 67वां स्थान मिला। हालांकि, 2021 से इस सूचकांक का स्कोर घटकर मौजूदा 40.7% पर आ गया है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि अन्य संकेतकों के मामले में भारत में समानता का स्तर तुलनात्मक रूप से कम रहा।

संसद और मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व की स्थिति

संसद में 2026 में लैंगिक समानता का स्तर 16.1% रहा, जो 2006 के मुकाबले कुल 7 प्रतिशत अंक का सुधार है। मंत्रियों के स्तर पर भारत ने कुल 2.4 प्रतिशत अंक की प्रगति की है। यह 2006 में 3.5% से बढ़कर 2026 में 5.9% हो गया है। हालांकि, यह 2019 में देश के सबसे ज्यादा स्कोर 30% से काफी कम है।

वैश्विक स्तर पर राजनीतिक सशक्तीकरण में उतार-चढ़ाव

रिपोर्ट के अनुसार, 2006 के बाद से दुनिया भर में राजनीतिक सशक्तीकरण में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई है, लेकिन 2016 से इसमें गिरावट आ रही है। डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी 2022 में अपने उच्चतम स्तर पर थी, लेकिन अब यह घटकर 2016 के स्तर पर आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं मंत्रिमंडल तक तो पहुंची हैं, लेकिन सर्वाधिक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव वाली भूमिकाओं में उनकी भागीदारी कम है।

सीईओ और एआई क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पदों पर 19.1% महिलाएं हैं। वहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इंजीनियरों में महिलाओं की हिस्सेदारी प्रत्येक पांच में एक से भी कम है और एआई कंपनियों में हर स्तर पर उनकी भागीदारी कम है।

लैंगिक समानता हासिल की जा सकती है : सादिया जाहिदी

डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा कि 20 साल के आंकड़े बताते हैं कि लैंगिक समानता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हर तरह की अर्थव्यवस्थाओं ने प्रगति की है और इसलिए संसाधनों की कमी को रुकावट नहीं माना जा सकता।

चार देश हर बार शीर्ष 10 में रहे

डब्ल्यूईएफ के अनुसार, 2006 से अब तक चार अर्थव्यवस्थाएं हर बार शीर्ष 10 में रही हैं। इनमें आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल हैं। आइसलैंड एकमात्र ऐसा देश है जिसने लैंगिक अंतराल को 90% से अधिक, यानी 93%, तक कम कर लिया है। (इनपुट: भाषा)