भारत-रूस के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग को बढ़ाने पर बनी सहमति

भारत और रूस ने आज शुक्रवार को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने कहा कि उनका स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग का आधार है। बयान के मुताबिक इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन- इसरो) और (रशियन स्टेट स्पेस कॉरपोरेशन- रोसकोस्मोस) के बीच बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है। यह साझेदारी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, सैटेलाइट नेविगेशन, ग्रहों की खोज और रॉकेट इंजन के विकास, उत्पादन और तैनाती जैसे क्षेत्रों को कवर करती है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों देशों ने सरकार-से-सरकार, अकादमिक जगत और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज का विकास और उपयोग तेज हो सके। दोनों देशों ने माना कि क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ्स उभरती तकनीकों और आधुनिक विनिर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, उन्होंने इन खनिजों की खोज, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि व्यक्त की।

नेताओं ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में संयुक्त शोध पर जोर देते हुए कहा कि रोडमैप फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कोऑपरेशन के तहत सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने दोनों देशों के सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच स्टार्टअप्स और स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज-एसएमईज के लिए अवसर बढ़ाने का निर्णय लिया। इसमें संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, को-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और नवाचार के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों का समाधान शामिल होगा। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक में भी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। इसमें इन्फॉर्मेशन प्रोटेक्शन,क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी और लॉ एनफोर्समेंट एप्लिकेशंस जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इसके अलावा, दोनों देशों ने स्टार्टअप्स के लिए कौशल विकास, ज्ञान विनिमय और इनोवेटर्स-उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए समर्थन कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति जताई।

विज्ञान और उच्च शिक्षा में पहले से मौजूद मजबूत संबंधों के आधार पर दोनों देशों ने शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। इसमें छात्र एवं शोधकर्ता विनिमय, संयुक्त शिक्षा कार्यक्रम, वैज्ञानिक अनुसंधान परियोजनाएं और विशेष अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और सेमिनारों का आयोजन शामिल होगा। दोनों देशों ने रोडमैप फॉर इंडियन-रशियन कोऑपरेशन इन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन्स के तहत सहयोग का विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई।-(PIB)