न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए81) के दौरान आयोजित वैश्विक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में भारत ने सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करने की दिशा में भारत की प्रगति और सिकल सेल बीमारी से निपटने के लिए देश की पहल को वैश्विक मंच पर रखा। यूएनजीए81 का उच्चस्तरीय सामान्य विमर्श 22 सितंबर से शुरू हुआ, जबकि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज और ‘वनएससीडी’ से जुड़े कार्यक्रम 23 सितंबर को आयोजित हुए।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑफ यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज और ग्लोबल हेल्थ’ की सातवीं वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक में पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भारत के व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए समुदायों के करीब स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की जानकारी दी। इनमें प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच और प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, पैलिएटिव केयर के साथ निवारक, संवर्धनात्मक और उपचारात्मक सेवाएं शामिल हैं।
वित्तीय सुरक्षा पर भी दिया जोर
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा मजबूत करना यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा तथा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम को भी मरीजों पर आर्थिक बोझ कम करने और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने वाली पहलों के तौर पर रेखांकित किया गया।
डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को बताया अहम
भारत के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे का उल्लेख करते हुए श्रीवास्तव ने बताया कि 90 करोड़ से अधिक नागरिकों के पास यूनिक हेल्थ आईडी है। स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की इंटरऑपरेबल डिजिटल रजिस्ट्री तथा आभा-इनेबल्ड हेल्थ रिकॉर्ड देखभाल की निरंतरता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं।
ई-संजीवनी से 49.7 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। ई-संजीवनी के माध्यम से 49.7 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन की सुविधा दिए जाने की जानकारी दी गई। टेली-रेडियोलॉजी, एआई-इनेबल्ड एक्स-रे और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी सेवाओं को भी दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उपयोगी बताया गया।
2030 तक हेपेटाइटिस खत्म करने का लक्ष्य
यूएनजीए81 के ‘हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाना’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भारत ने हेपेटाइटिस बी और सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बनने से रोकने और 2030 तक इनके उन्मूलन की दिशा में प्रयासों को रेखांकित किया। भारत ने शुरुआती पहचान, किफायती उपचार और रोकथाम तथा देखभाल को एकीकृत करने वाली रणनीति पर जोर दिया। भारत सरकार ने 2018 में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था।
22.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत वायरल हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर तृतीयक देखभाल केंद्रों तक की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कार्यक्रम के तहत लगभग 22.5 करोड़ लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और उपचार केंद्रों का नेटवर्क भी विस्तारित किया गया है। मां से बच्चे में संक्रमण रोकने के उपायों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल किया गया है।
‘वनएससीडी’ के जरिए वैश्विक साझेदारी
यूएनजीए81 के दौरान भारत ने ‘वनएससीडी: सिकल सेल केयर में समानता लाने और बदलाव लाने के लिए एक ग्लोबल पार्टनरशिप’ की शुरुआत में सह-मेजबानी की। कार्यक्रम में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम, जांच, उपचार और देखभाल तक अधिक समान और सुलभ पहुंच के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर दिया गया। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ‘वनएससीडी’ साझेदारी का उद्देश्य सिकल सेल बीमारी के अधिक बोझ वाले देशों में रोकथाम, निदान और उपचार तक पहुंच बेहतर करने के प्रयासों को तेज करना है।
2047 तक सिकल सेल उन्मूलन का लक्ष्य
कार्यक्रम में पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 2023 में शुरू किए गए नेशनल सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन के तहत भारत के प्रयासों की जानकारी दी। मिशन का लक्ष्य 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करना है। इसके तहत आबादी स्तर पर स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, उपचार, फॉलो-अप और डिजिटल ट्रैकिंग को स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
7.29 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
मिशन के तहत 7.29 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, 20 लाख से अधिक कैरियर की पहचान और 2.5 लाख लोगों में बीमारी की पहचान किए जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा 4.93 करोड़ से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य बीमारी की जल्द पहचान, उपचार की निरंतरता और प्रभावित लोगों तथा परिवारों में जागरूकता को मजबूत करना है।
किफायती जांच और उपचार तक पहुंच पर जोर
भारत ने सिकल सेल बीमारी के लिए किफायती पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स और हाइड्रॉक्सीयूरिया थेरेपी तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही स्वदेशी जीन-एडिटिंग थेरेपी पर चल रहे अनुसंधान का भी उल्लेख किया गया। डब्ल्यूएचओ ने भी सिकल सेल बीमारी के उपचार में हाइड्रॉक्सीयूरिया की भूमिका और बच्चों एवं किशोरों तक प्रभावी उपचार पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
वैश्विक मंच पर भारत का स्वास्थ्य मॉडल
यूएनजीए81 में भारत की भागीदारी के दौरान यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, डिजिटल स्वास्थ्य, हेपेटाइटिस उन्मूलन और सिकल सेल देखभाल से जुड़े अनुभव साझा किए गए। इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने, शुरुआती जांच और उपचार को बेहतर बनाने तथा वैश्विक साझेदारियों के जरिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर रहा। (इनपुट: पीआईबी)


