भारत-यूएई सीईपीए के चार साल पूरे, द्विपक्षीय व्यापार ने छुआ नया शिखर

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर दुबई में कारोबार और नीति क्षेत्र से जुड़े प्रमुख नेताओं ने बैठक कर दोनों देशों की तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने पर चर्चा की।

इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल दुबई ने किया, जिसमें सरकारी प्रतिनिधियों, राजनयिकों, निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में सीईपीए के प्रभाव की समीक्षा करने के साथ-साथ भविष्य के सहयोग की रूपरेखा पर भी विचार किया गया।

व्यापार में 37% की बढ़ोतरी

इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल दुबई के महासचिव डॉ. साहित्य चतुर्वेदी ने कहा कि 2022 में समझौता लागू होने के बाद से भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार में 37% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि यूएई से भारत को होने वाला निर्यात 41% बढ़ा है, जबकि भारत का यूएई को निर्यात 30% तक पहुंच गया है। दोनों देश अब वर्ष 2032 तक व्यापार को बढ़ाकर 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के संशोधित लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।

व्यापार से आगे बढ़कर आर्थिक एकीकरण पर जोर

यूएई-इंडिया सीईपीए काउंसिल के निदेशक अहमद अलजनेबी ने कहा कि यह साझेदारी अब केवल व्यापार सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि गहरे आर्थिक एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “अब फोकस विस्तार से आगे बढ़कर गहन एकीकरण पर है, जिससे कारोबार, स्टार्टअप और निवेशकों को स्वास्थ्य, सतत विकास, मैन्युफैक्चरिंग और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में नई पीढ़ी के अवसर मिल सकें।” उन्होंने कहा कि भारत-यूएई संबंध अब केवल व्यापार मात्रा से नहीं, बल्कि कंपनियों, पूंजी और प्रतिभा के आधार पर भी आंके जा रहे हैं।

कई क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं

बैठक के दौरान फार्मास्यूटिकल्स, स्वच्छ ऊर्जा, फिनटेक, एविएशन और डिजिटल कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने माना कि दोनों देशों की दीर्घकालिक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीति स्तर पर लगातार समन्वय बेहद जरूरी होगा।

सीईपीए 4.0 प्राथमिकताओं पर भी चर्चा

चर्चा में सीईपीए 4.0 की प्राथमिकताओं, नियामक ढांचे, निवेश सुविधा और उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस समझौते से बाजार पहुंच बेहतर हुई है, सप्लाई चेन अधिक मजबूत बनी है, निवेश प्रवाह बढ़ा है और कारोबारी विश्वास को नई मजबूती मिली है।

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