भारत ने अमेरिका से फोर्स्ड लेबर के आरोपों पर प्रस्तावित 12.5% टैरिफ प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की मांग की

भारत ने अमेरिका से भारतीय सामानों पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है।साथ ही भारत ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह ज़बरदस्ती मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने में नाकाम रहा है। अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं। भारत ने USTR को औपचारिक जवाब देते हुए बातचीत के लिए तैयार रहने का भी प्रस्ताव दिया है। 

USTR की जांच और प्रस्ताव

USTR ने मार्च 2026 में जबरन मजदूरी और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता को लेकर 60 देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच शुरू की थी। जून में जारी रिपोर्ट में 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया गया, जिसमें भारत और चीन प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारत ने 6 जुलाई को USTR को सौंपी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा कि USTR किसी भी विशिष्ट नीति या प्रथा को “अनुचित” साबित करने में नाकाम रहा है। 

भारत का तर्क

भारत ने स्पष्ट किया:
– USTR ने सभी 60 देशों के खिलाफ एक समान फैसला लिया बिना उनके कानूनों और क्रियान्वयन का देश-विशिष्ट मूल्यांकन किए।
– जबरन मजदूरी या फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक न लगाना अकेले में सेक्शन 301 के तहत “अनुचित” नहीं माना जा सकता।
– अमेरिकी उद्योग को कोई नुकसान पहुंचाने वाला “अनुचित तुलनात्मक लाभ” साबित नहीं हुआ है।
– भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यातों में जबरन मजदूरी के इनपुट का कोई संबंध नहीं दिखता।

भारत ने USTR से अनुरोध किया है कि प्रस्तावित टैरिफ पर पुनर्विचार किया जाए और किसी भी विशिष्ट चिंता को दूर करने के लिए रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है।नोट: USTR का यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नहीं किया गया है।यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देश हाल के वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। (इनपुट-एजेंसी)