भारत और अमेरिका ने मंगलवार को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ्स) की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और हाईटेक रक्षा उपकरणों जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी कच्चे पदार्थों की सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है।
चीन के दबदबे के बीच बढ़ा सहयोग
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों पर चीन के बढ़ते दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जाता है कि इन संसाधनों पर नियंत्रण के कारण चीन वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यह समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ, जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे।
सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर जोर
एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह फ्रेमवर्क क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की सप्लाई को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर क्वाड बैठक में भी चर्चा हुई और समान सोच वाले देशों के बीच सहयोग समय की जरूरत बन चुका है। उन्होंने बताया कि समझौते का उद्देश्य पूरी सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है। इसमें खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और संबंधित निवेश जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
‘एक ही देश पर निर्भरता जोखिमपूर्ण’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका का साझा रणनीतिक हित इस समझौते की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि मजबूत और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्थाएं किसी एक देश या एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं रह सकतीं, क्योंकि ऐसी स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। रुबियो ने कहा कि हाल के दिनों में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की अहमियत पर चर्चा की है और यह समझौता उसी साझेदारी का ठोस उदाहरण है।
फरवरी में रखी गई थी समझौते की नींव
मार्को रुबियो ने बताया कि इस समझौते की आधारशिला 4 फरवरी को रखी गई थी, जब भारत ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में भाग लिया था। उन्होंने भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर करने का भी उल्लेख किया। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक समूह है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करना है। (इनपुट: एजेंसी)


