अलास्का में सम्पन्न हुआ भारत-अमेरिका जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज ‘युद्ध अभ्यास 2025’

भारत और अमेरिका के बीच होने वाला जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज ‘युद्ध अभ्यास 2025’ सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को अलास्का के फोर्ट वेनराइट और युकोन ट्रेनिंग एरिया में सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। यह अभ्यास 1 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन समारोह के साथ शुरू हुआ था और दो हफ्तों तक चला। इस 21वें संस्करण में दोनों देशों की सेनाओं के 450-450 जवानों ने भाग लिया। भारतीय सेना का नेतृत्व मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन ने किया, जबकि अमेरिकी पक्ष से 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिक शामिल हुए।

भारतीय दूतावास वॉशिंगटन के मुताबिक, ‘युद्ध अभ्यास’ 2002 में शुरू हुआ था और तब से यह एक पलटन-स्तरीय शांति मिशन अभ्यास से विकसित होकर अब भारत के सबसे उन्नत द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में से एक बन गया है। इस बार का अभ्यास भारतीय सेना के लिए सैनिकों की सबसे बड़ी तैनाती में से एक रहा और इसमें व्यापक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शामिल रहा। अंतिम चरण में दोनों सेनाओं ने संयुक्त कमान ढांचे के तहत एकीकृत अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी, एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।

युकोन ट्रेनिंग एरिया में लाइव-फायर ड्रिल्स आयोजित की गईं, जिनमें मोर्टार अभ्यास भी शामिल थे। इन अभ्यासों का मकसद लक्ष्य साधने की सटीकता, फायर कंट्रोल और संचार प्रणालियों की क्षमता का परीक्षण करना था। फील्ड ट्रेनिंग के तहत छोटे यूनिट के युद्धाभ्यास, सामरिक गश्त, स्नाइपर और टोही प्रशिक्षण, आईईडी निरोधक अभ्यास और बाधा बिछाने व विस्फोटक संचालन की ट्रेनिंग दी गई।

वहीं 11 सितंबर को ‘डिस्टिंग्विश्ड विजिटर डे’ आयोजित किया गया, जिसमें लाइव-फायर युद्धाभ्यास और संयुक्त युद्ध समूह संचालन का प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर दोनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने सैनिकों की सहज तालमेल की सराहना की और इसे भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग की बढ़ती गहराई का प्रतीक बताया।

अलास्का की कठिन उप-आर्कटिक परिस्थितियों को देखते हुए, सैनिकों ने मेडिकल रेडीनेस की भी ट्रेनिंग ली। इसमें घायलों की निकासी, शीतदंश (फ्रॉस्टबाइट) से बचाव, ऊंचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली और चरम मौसम में बल की स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे।

भारतीय दूतावास ने इस अभ्यास को भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के अनुरूप बढ़ती सैन्य सहयोग की मिसाल बताया। दूतावास ने कहा कि इस अभ्यास ने दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को अपनाने और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में एक साथ काम करने का अनुभव दिया, जिससे उनकी पारस्परिक क्षमता और युद्धक तत्परता में वृद्धि हुई।-(Input With Agency)

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