विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता बातचीत के ‘अंतिम चरण’ में है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि जब तक समझौते को औपचारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक कुछ भी तय नहीं माना जा सकता।
नई दिल्ली में आयोजित एक निजी टीवी कार्यक्रम वर्ल्ड समिट के एक सत्र में बोलते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया है कि समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “आपने न केवल विदेश मंत्री रुबियो से, बल्कि मंत्री पीयूष गोयल और अन्य लोगों से भी सुना है। मैंने भी कहा है कि हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” हालांकि, विदेश मंत्री ने सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, “जब तक कोई काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक उसे पूरा हुआ नहीं माना जा सकता।”
उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत के अंतिम चरण में अक्सर कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। उन्होंने कहा, “अक्सर अंतिम चरण या उससे ठीक पहले के चरण में अपनी चुनौतियां होती हैं। मेरा मानना है कि बातचीत कर रही टीमें फिलहाल इन चुनौतियों से निपट रही हैं।” जब उनसे पूछा गया कि समझौते को अंतिम रूप देने में किन मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है, तो उन्होंने इसका विवरण देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर आप मुझसे पूछ रहे हैं कि वे चुनौतियां वास्तव में क्या हैं, तो मुझे माफ कीजिए, मैं इस बारे में नहीं बताऊंगा। इन मुद्दों को सुलझाने का काम वार्ताकारों का है।”
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों के बीच आई है। दोनों देशों के बीच कई वर्षों से इस समझौते पर चर्चा चल रही है। इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में विदेश मंत्री की टिप्पणी सत्र के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रही। इससे दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक और वाणिज्यिक बातचीत पर ध्यान केंद्रित हुआ।
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई उनकी बैठक के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, “विदेश मंत्री ने इस बात को दोहराया कि अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से भारत की आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और उसकी बड़ी उपभोक्ता मांग को पूरा करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई जा सकती है।”
रुबियो ने द्विपक्षीय रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने अमेरिकी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों की अधिक खरीद को प्रोत्साहित किया। बैठक में मौजूद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बातचीत को ‘उत्पादक’ बताया। उन्होंने कहा कि चर्चा रक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
(IANS)


