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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, व्हाइट हाउस ने बातचीत को बताया ‘सार्थक’

व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा है कि ट्रम्प प्रशासन भारत के साथ एक “ऐतिहासिक व्यापार समझौते” को लेकर सार्थक बातचीत कर रहा है। इससे कुछ घंटे पहले वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हेग में बताया था कि दोनों पक्षों के बीच ज्यादातर चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और अब समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता मैथ्यू मिडलटन ने बताया, “ट्रम्प प्रशासन के प्रतिनिधि भारतीय अधिकारियों के साथ सार्थक बातचीत कर रहे हैं, ताकि एक ऐसा ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया जा सके जो अमेरिकियों और अमेरिका को प्राथमिकता दे।”

उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीबी व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पीयूष गोयल का बयान: ज्यादातर मुद्दे सुलझा लिए गए

सोमवार को हेग में आयोजित ‘इंडिया-नीदरलैंड्स बिजनेस फोरम’ में पीयूष गोयल ने कहा, “हमने ज्यादातर चर्चाएं पूरी कर ली हैं और अब समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं।” गोयल एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ जर्मनी और नीदरलैंड्स के दौरे पर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पूरे किए हैं।

फरवरी के फ्रेमवर्क से लेकर अक्टूबर तक की प्रगति

भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे की घोषणा की थी। 7 फरवरी को घोषित इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। बाद में अमेरिकी शुल्क नीति में बदलाव और टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण आगे और बातचीत हुई। 1 अक्टूबर को मिलवॉकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान गोयल ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात की। इसके बाद वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने 15 से 17 अक्टूबर तक वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की।

रुबियो का आकलन: बस कुछ मुद्दे बाकी

20 अक्टूबर को मुंबई यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि दोनों पक्ष समझौते के बहुत करीब हैं। रुबियो ने पत्रकारों से कहा, “हम बहुत, बहुत करीब हैं। मैं कहूंगा कि हम समझौते के इतने करीब हैं कि बस उसे अंतिम रूप देना बाकी है। कुछ ही चीजें बची हैं जिन्हें सुलझाना है, और मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही हो जाएगा।”

क्या चाहता है अमेरिका, क्या चाहता है भारत

वाशिंगटन नई दिल्ली पर अमेरिकी ऊर्जा और तकनीक की ज्यादा खरीदारी का दबाव बनाए हुए है, जबकि भारतीय निर्यातक अमेरिकी टैरिफ से राहत की मांग कर रहे हैं। भारत ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में वह अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदेगा। अमेरिका फिलहाल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों में इन वार्ताओं पर करीबी नजर रखी जा रही है। (इनपुट-एजेंसी)