राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली में रूसी संघ की संघीय सभा के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन के नेतृत्व वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों और संसदीय आदान-प्रदान को मजबूत करने पर चर्चा हुई। राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि भारत और रूस वर्ष 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
वोलोडिन को दोबारा चुने जाने पर दी बधाई
सी. पी. राधाकृष्णन ने व्याचेस्लाव वोलोडिन और उनके साथ आए रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष के रूप में दोबारा चुने जाने पर वोलोडिन को बधाई दी। साथ ही, सितंबर 2026 में स्टेट ड्यूमा के नौवें कार्यकाल के लिए हुए चुनावों के सफल आयोजन पर भी शुभकामनाएं दीं।
भारत-रूस संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव का उल्लेख
दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों और सद्भावना के अवसरों का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने सितंबर 2026 में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट किया था। उन्होंने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
संसदीय आदान-प्रदान और हालिया बैठकों पर चर्चा
राज्यसभा के सभापति ने दोनों देशों के सांसदों के बीच नियमित आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मई 2025 में कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व में पांच सांसदों के रूस दौरे का उल्लेख किया। यह दौरा पहलगाम आतंकवादी हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में हुआ था। उन्होंने दिसंबर 2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प पर जोर
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत और रूस के संबंधों की नींव आपसी विश्वास और सहयोग पर टिकी है। उन्होंने आतंकवाद से मुकाबला करने के दोनों देशों के साझा संकल्प को रूस के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारियां चल रही हैं। यह अवसर भारत और रूस के दीर्घकालिक संबंधों तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की उपलब्धियों को रेखांकित करेगा।
2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
आर्थिक सहयोग पर चर्चा करते हुए राज्यसभा के सभापति ने विश्वास जताया कि दोनों देश अपने नेतृत्व के बीच बनी सहमति के अनुसार वर्ष 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लेंगे। उन्होंने अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क को द्विपक्षीय साझेदारी के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई
बैठक के समापन पर राधाकृष्णन ने कहा कि इस तरह की चर्चाएं एक-दूसरे की प्राथमिकताओं को समझने, अनुभव साझा करने और सहयोग के व्यावहारिक रास्ते तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में कई सांसद और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस मुलाकात के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा, डॉ. के. लक्ष्मण, सुजीत कुमार, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और संजय कुमार झा उपस्थित रहे। इसके अलावा, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी, एचवीपीआई के सचिव अमित खरे और सचिव के. एस. सोमशेखर भी बैठक में मौजूद थे। (इनपुट: पीआईबी)


