पाकिस्तान को दिए जाने वाले बेलआउट पैकेज की समीक्षा के लिए भारत आज आईएमएफ के समक्ष रखेगा अपना पक्ष

भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिल रहे बेलआउट पैकेज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आज वाशिंगटन में होने वाली IMF बोर्ड बैठक में भारत अपना पक्ष रखने जा रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को बताया कि IMF के सामने भारत की ओर से देश के कार्यकारी निदेशक पाकिस्तान को दिए जा रहे लोन की समीक्षा के दौरान भारत की चिंताएं व्यक्त करेंगे। विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान को अब तक IMF से कुल 24 बेलआउट पैकेज मिल चुके हैं, लेकिन इनमें से कई का कोई प्रभावी परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश पाकिस्तान की मदद के लिए खुले हाथ से फंड दे रहे हैं, उन्हें इस पर विचार करना चाहिए कि इन पैसों का उपयोग कहां हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि यह फंडिंग अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियों को फायदा पहुंचा रही है, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकवादी संगठनों को समर्थन देती हैं।

पाकिस्तान को हाल ही में IMF से दो महत्वपूर्ण पैकेज प्राप्त हुए हैं। पहला, सितंबर 2024 में स्वीकृत $7 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज, जिसमें से $1 बिलियन पहले ही मिल चुका है। दूसरा, मार्च 2025 में मंजूर हुआ $1.3 बिलियन डॉलर का जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience) लोन है। भारत ने इन लोन की पारदर्शिता और उपयोग पर सवाल उठाए हैं। विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान की वैश्विक आतंकवाद से जुड़ी छवि किसी से छुपी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में पाया गया था और वहां की सरकार के एक वरिष्ठ नेता ने उसे ‘शहीद’ कहा था। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कई आतंकवादी अब भी पाकिस्तान में खुलेआम काम कर रहे हैं।

भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 28 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकवादी शिविरों पर हमले किए गए थे। IMF की आज की समीक्षा बैठक इस बात का निर्णय करेगी कि क्या पाकिस्तान को अगली वित्तीय किश्त दी जानी चाहिए। भारत का कहना है कि इस तरह की फंडिंग पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है, इसलिए इन बेलआउट पैकेजों की सख्त समीक्षा होनी चाहिए।

 

 

 

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