भारत अब अपने प्रमुख बंदरगाहों को अपग्रेड करके और नए गहरे पानी वाले टर्मिनलों का निर्माण तेजी से करके विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स (जैसे कोलंबो और सिंगापुर) पर अपनी निर्भरता कम करने जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार एन्नोर (चेन्नई), पारादीप (ओडिशा) और दीनदयाल (कच्छ) जैसे प्रमुख बंदरगाहों की जल गहराई (ड्राफ्ट) को 14 मीटर से बढ़ाकर 18 मीटर करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि बड़े-बड़े “मदर वेसल” (मुख्य मालवाहक जहाज) इन बंदरगाहों पर आ सकें।
विझिंजम में ऐतिहासिक पहुंच
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तब उठा जब दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज एमएससी इरिना हाल ही में केरल के विझिंजम बंदरगाह पहुंचा। रिपोर्ट में इसे भारत की समुद्री महत्वाकांक्षा का बड़ा प्रतीक बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई दशकों तक भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा के बावजूद बड़े मदर वेसल को संभालने वाले बंदरगाहों की कमी रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर काम शुरू किया है।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर जोर
– वधावन बंदरगाह (महाराष्ट्र): लगभग 20 मीटर की प्राकृतिक गहराई के साथ विकसित किया जा रहा है। पूरा होने पर यह दुनिया के टॉप-10 कंटेनर ट्रांसशिपमेंट हब में शामिल हो सकता है।
– मुंद्रा बंदरगाह (गुजरात): 17.5 मीटर ड्राफ्ट के साथ पहले से ही 14,000 टीईयू से बड़े जहाजों को संभाल रहा है और सीधे अमेरिका को माल भेज रहा है।
– अन्य बंदरगाहों में ड्राफ्ट बढ़ाकर केप-साइज जहाजों (लगभग 2 लाख टन क्षमता) को लाने की तैयारी चल रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत न सिर्फ अपने निर्यात-आयात को तेज करे बल्कि क्षेत्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में भी उभरे। इससे समय, लागत और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह विकास भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)


