नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारतीय मूल के अमेरिकी परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। माउंट कैलाश की तीर्थयात्रा पर गए कई यात्री संपर्क से बाहर हैं। बाढ़ इतनी भयंकर थी कि भूकंप मापने वाले यंत्रों ने भी इसे कुछ समय तक भूकंप के रूप में दर्ज किया।
परिवारों का दर्द और बेचैनी भरा इंतजार
न्यूयॉर्क में रह रहे शशिधरन श्रीधरन को अपनी पत्नी रेखा और 14 वर्षीय बेटी राशि का आखिरी मैसेज रात 10 बजे (न्यूयॉर्क समय) मिला था। अगली सुबह तक उनका रास्ता कीचड़ और पानी में डूब चुका था। दोनों ने माउंट कैलाश की यात्रा पूरी कर बुधवार दोपहर नेपाल लौटने का कार्यक्रम बनाया था, लेकिन ग्लेशियर टूटने की आशंका के बीच आई बाढ़ ने सब कुछ बदल दिया। श्रीधरन ने कहा, “ये मेरी जिंदगी के सबसे बुरे 48 घंटे रहे हैं। हम उनके ठिकाने की अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं। आखिरी बात 26 अगस्त को हुई थी। उम्मीद है कि वे और बाकी तीर्थयात्री सुरक्षित होंगे।” वे लगातार फोन चेक कर रहे हैं और पासपोर्ट व फोन नंबर साझा कर मदद मांग रहे हैं।
डॉ. राधिका शर्मा सोशल मीडिया पर अपने माता-पिता—65 वर्षीय रमेश शर्मा और 64 वर्षीय नीलम शर्मा—की जानकारी मांग रही हैं। दोनों अमेरिकी नागरिक हैं और यात्रा के दौरान संपर्क टूट गया। वर्जीनिया में ऋत्विक रंगू अपने पिता से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं। उनके परिवार ने दस से अधिक भारतीय-अमेरिकी और भारतीय-कनाडाई नागरिकों की सूची तैयार कर नाम, पासपोर्ट और फोन नंबर भेजे हैं।
अमेरिकी और नेपाली अधिकारी सक्रिय
न्यूयॉर्क में नेपाल के कॉन्सल जनरल दधिराम भंडारी ने बताया कि कई भारतीय मूल के अमेरिकी परिवारों ने कॉन्सुलेट से संपर्क किया है। कॉन्सुलेट ने 25 से अधिक अमेरिकी नागरिकों की जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय को दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि लापता अमेरिकियों की संख्या में उतार-चढ़ाव हो रहा है। काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
समुदाय और धार्मिक नेताओं की अपील
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेता प्रेम भंडारी (जयपुर फुट यूएसए, राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका और BRAHUD से जुड़े) ने कहा, “यह आसमान से आई सुनामी जैसी थी। हर साल भारतीय-अमेरिकी भी कैलाश यात्रा पर जाते हैं। अमेरिका से गए सैकड़ों लोगों की अभी कोई जानकारी नहीं है। हमने हेल्पलाइन जारी की है। उम्मीद है कि सभी सुरक्षित लौटेंगे।” उनका फोन अब 24 घंटे की हेल्पलाइन बन गया है। आध्यात्मिक गुरु स्वामी अवधेशानंद गिरि न्यूयॉर्क पहुंचे और राहत कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने भारतीयों, नेपालियों और अन्य देशों के लापता लोगों का जिक्र करते हुए भारतीय संगठनों से मदद का आग्रह किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संवेदना और सहायता पेश करने के लिए धन्यवाद दिया।
आधिकारिक आंकड़े और बचाव अभियान
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की छठी स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा में भोटे कोशी बाढ़ के बाद 389 शव बरामद हुए हैं और 977 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में नेपाल पुलिस के 28, सेना के 45, सशस्त्र पुलिस के 13 जवान, कस्टम के 15 और आव्रजन कार्यालय के 4 कर्मचारी शामिल हैं। विदेशी नागरिकों की संख्या 517 और विदेश में रहने वाले नेपाली 127 बताई गई है। 73 लोग घायल हुए हैं। खोज-बचाव के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं—पुलिस के 7,250, सेना के 4,200 और सशस्त्र पुलिस के 1,845। 15 हेलीकॉप्टर (6 सेना के, 9 निजी) शामिल हैं। हेलीकॉप्टरों से 1,976 लोगों को बचाया गया है। 12 विषय-विशिष्ट आपातकालीन समन्वय टीमें काम कर रही हैं। सड़कें साफ करने का काम भी जारी है। नेपाल सरकार ने राहत के लिए 25 मिलियन नेपाली रुपये भेजे हैं। विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकारी तंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहा है। प्राथमिकता जान बचाना, लापता लोगों की खोज, घायलों का इलाज और राहत पहुंचाना है।
भारत की तरफ से बचाव अपडेट
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि त्रिशूली-I प्रोजेक्ट के 63 कर्मचारियों और तमिलनाडु के 21 कैलाश यात्रियों सहित कुल 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। मंत्रालय ने उनके नाम जारी किए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संपर्क टूटे भारतीय नागरिकों की लोकेशन पता लगाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। परिवार अभी भी फोन थामे इंतजार कर रहे हैं। तस्वीरें हाथ में लिए वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हिमालय के मलबे में उनके अपनों की तलाश जारी रहेगी। (इनपुट-एजेंसी)


