लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के न्यूज़ीलैंड दौरे को लेकर भारतीय समुदाय में भारी उत्साह और खुशी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10-11 जुलाई को ऑकलैंड दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं और समुदाय इसे ऐतिहासिक अवसर मान रहा है।
समुदाय के सदस्यों का मानना है कि इस दौरे से भारत-न्यूज़ीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी, खासकर प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में।
पीएम मोदी इस यात्रा को लेकर भारतीय समुदाय के कई सदस्यों ने अपने विचार साझा किए। एक सदस्य ने कहा, “कई सालों बाद यह बहुत सकारात्मक घटनाक्रम है। प्रस्तावित FTA दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी की शुरुआत साबित होगा। हम उम्मीद करते हैं कि व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए रास्ते खुलेंगे।”
एक अन्य समुदाय सदस्य ने कहा, “यह न केवल भारतीय समुदाय बल्कि पूरे न्यूज़ीलैंड के लिए फायदेमंद होगा। मजबूत व्यापारिक संबंधों से दोनों पक्षों को लाभ होगा और युवाओं तथा व्यवसायियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।”
व्यवसायियों में भी बढ़ा उत्साह
एक भारतीय व्यवसायी ने पीएम मोदी की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर में भारतीयों को गौरवान्वित महसूस कराया है। हम चाहते हैं कि भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध और मजबूत हों। यहां अपना व्यवसाय बढ़ाने और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए हमें और ज्यादा अवसर चाहिए।”
ऑकलैंड में काम करने वाले एक रेस्तरां कर्मचारी ने बताया, “पूरे ऑकलैंड में भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह है। हर कोई प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए बेताब है।”
दौरे का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी 10-11 जुलाई को न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता मार्च में हुई लक्सन की भारत यात्रा के सकारात्मक नतीजों को आगे बढ़ाते हुए मुक्त व्यापार समझौते और आर्थिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।
यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘MAHASAGAR’ विजन को मजबूती देगा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक मुक्त, खुला और समावेशी व्यवस्था बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा।
पीएम मोदी इस समय इंडोनेशिया में हैं और न्यूज़ीलैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेंगे। न्यूज़ीलैंड के भारतीय समुदाय का कहना है कि चार दशकों बाद हो रहे इस उच्चस्तरीय दौरे से न सिर्फ द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि विदेश में बसे भारतीयों का मनोबल भी और बढ़ेगा। (इनपुट-एजेंसी)


