भारत के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 से 2032 के बीच 91 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज होने का अनुमान है। Nuvama की रिपोर्ट के मुताबिक, रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने, बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने और चौबीसों घंटे बिजली की जरूरतों को पूरा करने में बैटरी स्टोरेज की अहम भूमिका होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल BESS क्षमता वित्त वर्ष 2026 के 6.3 GWh से बढ़कर वित्त वर्ष 2032 तक 302 GWh पहुंच सकती है। इस दौरान सालाना क्षमता वृद्धि 5.7 GWh से बढ़कर 56 GWh होने का अनुमान है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुमान के मुताबिक, भारत में BESS की मांग 2032 तक 236 GWh और 2047 तक 1,840 GWh हो सकती है।
Nuvama ने कहा कि मौजूदा जरूरतों का करीब 89 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है। बैटरी की घटती लागत और ALMM जैसी संभावित नीति व्यवस्था से घरेलू उत्पादन, स्थानीयकरण और इस सेक्टर को अपनाने की रफ्तार बढ़ सकती है। फिलहाल BESS बाजार में लिथियम-आयन तकनीक की हिस्सेदारी करीब 98 प्रतिशत है। रिपोर्ट में सोडियम-आयन तकनीक और China+1 रणनीति को भी भारत के लिए अवसर बताया गया है।
मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और रिटेल सेगमेंट में प्रति kWh 18 से 23 डॉलर का स्प्रेड और 17 से 20 प्रतिशत EBITDA मार्जिन मिलने का अनुमान है। वहीं, यूटिलिटी सेगमेंट में प्रति kWh 8 डॉलर का स्प्रेड और 9 प्रतिशत EBITDA मार्जिन रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, कम स्प्रेड के बावजूद इस सेगमेंट में निवेश की लागत एक से दो साल में वसूल होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटीग्रेटेड BESS फैसिलिटी का इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (IRR) करीब 12 प्रतिशत हो सकता है। घरेलू उत्पादन को प्रति GWh 80 मिलियन डॉलर के पूंजीगत खर्च, 50 GWh क्षमता के लिए 181 अरब रुपये के प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) समर्थन और प्रतिस्पर्धी श्रम लागत से फायदा मिल सकता है। वहीं, सेल-टू-पैक कॉन्फिगरेशन में IRR करीब 31 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
कंपनी स्तर पर भी BESS से कमाई बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2028 तक BESS से जुड़ा कारोबार कंपनियों के रेवेन्यू में 17 से 60 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है।
Nuvama का मानना है कि नीतिगत समर्थन, स्थानीय उत्पादन और बड़े पैमाने पर क्षमता विस्तार से भारत में BESS सेक्टर निर्यात आधारित ग्रोथ का अवसर बन सकता है। क्षमता बढ़ने के साथ यह सेक्टर कंपनियों की कमाई में सुधार और वैल्यूएशन में दोबारा बढ़ोतरी का प्रमुख कारक बन सकता है।
(इनपुट-ANI)


