ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक रणनीति ने हासिल की बड़ी सफलता: रिपोर्ट

भारत की व्यापक रणनीति (ग्रैंड स्ट्रैटेजी) ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बड़ी कूटनीतिक सफलता दिलाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सदस्य देशों के विविध हितों के बीच संतुलन बनाते हुए बहुपक्षवाद को व्यावहारिक दिशा दी और दुनिया को अपने रणनीतिक उभार का स्पष्ट संदेश दिया। ‘इंडिया नैरेटिव’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि नई दिल्ली ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ऐसी रणनीति अपनाई, जिससे यह मंच भू-राजनीतिक टकराव या रूस और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के प्रभाव की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बनने से बचा रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रणनीति तीन प्रमुख बदलावों पर आधारित रही। पहला, बहुपक्षवाद को व्यावहारिक बनाते हुए वैश्विक शासन संस्थाओं और ढांचों में सुधार को आगे बढ़ाना। दूसरा, ब्रिक्स को सहयोग और लचीलापन बढ़ाने वाले रणनीतिक मंच के रूप में मजबूत करना। तीसरा, वैश्विक संकटों से निपटने के लिए भारत को टिकाऊ और रणनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने वाले प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा को विविधीकरण तथा समावेशिता के जरिए मजबूत करना शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्दे के पीछे चली गहन बातचीत ने भारत की “स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन” और “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” की नीति को प्रभावी ढंग से सामने रखा। भारत ने डी-हाइफनेशन के जरिए ब्रिक्स को संघर्षों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक एजेंडे पर केंद्रित रखा, जबकि रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से विभिन्न देशों के हितों में सामंजस्य स्थापित करते हुए आर्थिक सहयोग को केंद्र में रखा।

रिपोर्ट के अनुसार, इसी रणनीतिक संतुलन ने राजनीतिक मतभेदों के बीच भी आम सहमति बनाने में मदद की और ग्लोबल साउथ की आवाज को संयुक्त घोषणा पत्र में प्रमुखता दिलाई। इससे पहले जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में इसी रणनीति का सफल इस्तेमाल किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिखर सम्मेलन से पहले आशंका जताई जा रही थी कि संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति नहीं बन पाएगी, लेकिन भारत ने राष्ट्रीय और वैश्विक हितों के बीच संतुलन बनाते हुए सहमति सुनिश्चित की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल में भारत द्वारा एससीओ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद ब्रिक्स घोषणा पत्र में ईरान पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा और एकतरफा पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना भी शामिल की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता आतंकवाद के मुद्दे पर रही। ब्रिक्स घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घोषणा पत्र में पहलगाम हमले की “सबसे कड़े शब्दों में” निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर भी चिंता जताई गई। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को खारिज करते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई गई।(इनपुट-आईएएनएस)

RELATED ARTICLES

06/11/26 | 4:19 pm | India US military exercise

भारत-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026 संपन्न, विशाखापत्तनम में हुआ समापन समारोह

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास 'टाइगर ...

06/11/26 | 8:45 am | Democrats

ट्रंप ने ईरान पर और सैन्य कार्रवाई के दिए संकेत, डेमोक्रेट्स युद्ध खत्म करने की कर रहे तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। हाल...