रूस से भारत का ऊर्जा आयात रिकॉर्ड स्तर पर, हर महीने बन रहा नया कीर्तिमान: क्रेमलिन

रूस ने मंगलवार को कहा कि भारत द्वारा रूसी ऊर्जा के आयात में किसी तरह की कमी नहीं आई है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भारतीय पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत में कहा कि सुरक्षा कारणों से वह सटीक आंकड़े साझा नहीं कर सकते, लेकिन भारत को होने वाले रूसी ऊर्जा निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। यह बातचीत नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई।

हर महीने बन रहा नया रिकॉर्ड

पेस्कोव ने कहा कि भारत को रूसी ऊर्जा निर्यात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा, “मैं समझने योग्य कारणों से कोई संख्या नहीं बताना चाहता, लेकिन लगभग हर महीने हम एक नया रिकॉर्ड देख रहे हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार मजबूत बना हुआ है।

रुपए भुगतान से जुड़ी समस्या सुलझाने में प्रगति

भारत-रूस व्यापार में लंबे समय से चर्चा में रहे रुपए भुगतान संतुलन के मुद्दे पर भी क्रेमलिन ने सकारात्मक संकेत दिए। पेस्कोव ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार में जमा हुई रुपए की राशि से जुड़ी समस्याओं को धीरे-धीरे सुलझाया जा रहा है। दोनों देश इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के विकल्पों पर काम कर रहे हैं।

रेयर अर्थ्स पर सहयोग की तैयारी

पेस्कोव ने बताया कि भारत और रूस दुर्लभ मृदा खनिजों यानी रेयर अर्थ्स की खोज और विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन खनिजों का उपयोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा और उच्च तकनीक वाले उद्योगों में किया जाता है।

एसयू-57 की संभावित बिक्री भी एजेंडे में

रूस के अत्याधुनिक सुखोई एसयू-57 स्टेल्थ लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री का मुद्दा भी भारत-रूस बातचीत के एजेंडे में शामिल है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर

पेस्कोव ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने के प्रयासों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह किसी “डी-डॉलराइजेशन” अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया व्यावहारिक कदम है।

राष्ट्रीय हितों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था

क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा, “हम किसी डी-डॉलराइजेशन नीति का दावा नहीं कर रहे हैं। हम केवल वही कर रहे हैं जो हमारे राष्ट्रीय हितों के अधिक अनुकूल है।” उन्होंने कहा कि कुछ देश अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में करते हैं। ऐसे में रूस अपनी मुद्रा और अन्य स्वीकार्य भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।

डॉलर और यूरो पर प्रतिबंधों के बाद बदली रणनीति

पेस्कोव के मुताबिक, रूस को डॉलर और यूरो के इस्तेमाल पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उसने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अभी भी सभी स्वीकार्य भुगतान प्रणालियों और मुद्राओं के इस्तेमाल के लिए खुला है।

ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे पुतिन

क्रेमलिन ने पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, वित्त और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

मोदी-पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता

पेस्कोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा करेंगे।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का फोकस

वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसकी थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखी गई है। विस्तारित ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देश शामिल हैं।

साझेदार देशों से बढ़ा समूह का प्रभाव

ब्रिक्स के साझेदार देशों में बेलारूस, बोलिविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। इन देशों की भागीदारी से समूह का आर्थिक और भौगोलिक प्रभाव बढ़ा है।

भारत के लिए नए आर्थिक अवसर

विस्तारित ब्रिक्स भारत के लिए निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने के अवसर पैदा करता है। इसके साथ प्रौद्योगिकी सहयोग मजबूत करने और बहुध्रुवीय वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। (इनपुट: आईएएनएस)