भारत का पहला मल्टी-वेवलेंथ उपग्रह AstroSat, 10 साल बाद भी सक्रिय

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का पहला मल्टी-वेवलेंथ खगोल विज्ञान उपग्रह AstroSat ने अंतरिक्ष में वैज्ञानिक खोजों का 10 साल का सफर पूरा कर लिया है। 28 सितम्बर 2015 को इसे श्रीहरिकोटा से PSLV-C30 रॉकेट के ज़रिए 650 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया था।

1515 किलोग्राम वज़न वाला यह उपग्रह पराबैंगनी (UV), दृश्य प्रकाश और उच्च ऊर्जा एक्स-रे तरंगों में एक साथ ब्रह्मांड का अध्ययन करने की क्षमता रखता है। पिछले एक दशक में इसने कई उल्लेखनीय खोजें की हैं। इसमें 9 अरब प्रकाश-वर्ष दूर से फार-UV फोटॉन्स की खोज, तेज़ गति से घूमते ब्लैक होल और बाइनरी स्टार्स से निकलने वाले एक्स-रे का अध्ययन, बटरफ्लाई नेबुला का तीन गुना बड़ा आकार, गैलेक्सी का विलय और तारों के पुनः युवा होने जैसी खोजें शामिल हैं।

AstroSat ने भारत में खगोल विज्ञान शोध और शिक्षा को भी नई ऊँचाई दी है। अब तक 132 भारतीय विश्वविद्यालय इसके डेटा से जुड़े हैं और 57 देशों के करीब 3,400 वैज्ञानिक और छात्र इसके पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। इनमें से लगभग आधे भारतीय हैं, जिससे देश में नई पीढ़ी के खगोल वैज्ञानिक तैयार हो रहे हैं।

ISRO के अनुसार AstroSat को शुरुआत में केवल पाँच साल के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन अब दस साल पूरे होने के बाद भी यह सक्रिय है और इसके सभी पाँच वैज्ञानिक उपकरण सही तरह से काम कर रहे हैं। अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि आने वाले समय में भी AstroSat नई और रोमांचक खोजें उपलब्ध कराता रहेगा।

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