केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत का विकास मॉडल आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत ने टिकाऊ विकास को केवल एक लक्ष्य नहीं बल्कि जीवनशैली के रूप में अपनाया है। इससे न केवल आर्थिक वृद्धि होगी बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण के बीच संतुलन भी सुनिश्चित होगा। केंद्रीय मंत्री ने यह बातें 20वें ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी समिट को संबोधित करने के दौरान कहीं, इस दौरान उन्होंने भारत की पर्यावरणीय नीतियों और सतत विकास के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तार से चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रालय ने हाल ही में टिकाऊ भविष्य बनाने के लिए कई अहम सूचनाएं जारी की हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यापार तनाव, नीतिगत अनिश्चितता, भू-राजनीतिक संघर्ष और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा निवेश में आ रही बाधाएं एक नाजुक माहौल बना रही हैं। ऐसे में सभी देशों को चाहिए कि वे सर्कुलर इकोनॉमी, ग्रीन इंफ्रास्टक्चर, प्रकृति-हितैषी कदम अपनाकर टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दें।
इस बीच भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि 29 अगस्त को सरकार ने पर्यावरण ऑडिट नियम 2025 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों से पूरे देश में पर्यावरण ऑडिट का औपचारिक ढांचा तैयार होगा। इसमें दो-स्तरीय ऑडिटर प्रणाली और एक समर्पित एजेंसी की स्थापना का प्रावधान है, जो पारदर्शी तरीके से इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी। उन्होंने कहा कि यह नियम मौजूदा निगरानी और निरीक्षण प्रणाली के पूरक होंगे।
उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को ही ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम की संशोधित कार्यप्रणाली भी जारी की गई। यह कार्यक्रम अक्टूबर 2023 में शुरू किया गया था ताकि लोग स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्यों के लिए प्रेरित हों। अब इसमें निजी क्षेत्र की सीधी भागीदारी की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही न्यूनतम पुनर्स्थापन की शर्तें तय की गई हैं, जलवायु कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने का रास्ता खुला है और अर्जित ग्रीन क्रेडिट्स का उपयोग करने की सुविधा दी गई है। यादव ने कहा कि संशोधित कार्यप्रणाली से यह कार्यक्रम सार्थक पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का उत्प्रेरक बनेगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 31 अगस्त को मंत्रालय ने वन (संरक्षण एवं संवर्द्धन) नियम 2023 में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन 2025 को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत 24 खनिजों को अत्यावश्यक और रणनीतिक तथा 29 खनिजों को महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। यह खनिज देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेंगे। संशोधित नियमों से वन क्षेत्रों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र द्वारा खनिजों के खनन की स्वीकृति प्रक्रिया आसान हो गई है।-(IANS)


