सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा से मजबूत हो रही भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था

केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, मुफ्त जांच और दवाओं से लेकर मेडिकल शिक्षा के विस्तार तक कई पहलों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के अनुरूप ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें आर्थिक स्थिति या भौगोलिक दूरी इलाज के रास्ते में बाधा न बने।

आयुष्मान भारत से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत समाज के सबसे गरीब 40% परिवारों और 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है। योजना में 1,900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं और हर दिन 40,000 से अधिक दावों का निपटान किया जाता है। 12 अगस्त 2026 तक 45.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 30 जून 2026 तक 12.69 करोड़ बार अस्पताल में भर्ती होने की सुविधा दी गई, जिस पर कुल 1.92 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए। योजना से 38,466 से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल जुड़े हैं। आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों का नामांकन हुआ है और 3,000 करोड़ रुपए मूल्य के 13.84 लाख से अधिक उपचारों का लाभ लिया गया है। वहीं, 30 जून 2026 तक एबी-पीएमजेएवाई के तहत 29.05 लाख अंतरराज्यीय अस्पताल उपचारों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल राशि 8,383.97 करोड़ रुपए से अधिक है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से गांवों तक पहुंची प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा

देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने के लिए 12 अगस्त 2026 तक 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं। इन केंद्रों पर 12 तरह की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तक इन केंद्रों पर 540 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार पर जोर

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। 10 विशेष फोकस वाले राज्यों में 23,224 ग्रामीण हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के लिए सहायता दी जा रही है। सभी राज्यों में 13,736 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने का प्रावधान है। इसके अलावा 11 विशेष फोकस वाले राज्यों में 3,389 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, सभी जिलों में 744 एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और 5 लाख से अधिक आबादी वाले सभी जिलों में 631 क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम से जुड़ रहे करोड़ों रिकॉर्ड

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) को देश की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ के रूप में विकसित किया जा रहा है। 12 अगस्त 2026 तक 96.43 करोड़ आभा हेल्थ आईडी बनाए जा चुके हैं और 110 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड आभा से जोड़े गए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 5.46 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और 10.50 लाख से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हैं।

मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमारियों की रोकथाम के लिए कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.91 करोड़ से अधिक मुफ्त प्रसव-पूर्व जांचें की गई हैं और 1.24 करोड़ से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई है। एनएफएचएस-4 (2015-16) से एनएफएचएस-6 (2023-24) के बीच पहली तिमाही में प्रसव-पूर्व पंजीकरण 58.6% से बढ़कर 76.2% हो गया। चार या उससे अधिक बार प्रसव-पूर्व देखभाल लेने वाली माताओं का प्रतिशत 51.2% से बढ़कर 65.2% और संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 78.9% से बढ़कर 90.6% हो गया।

टीकाकरण अभियान को मिला विस्तार

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर साल 2.67 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को 12 बीमारियों के खिलाफ मुफ्त टीके दिए जाते हैं। 2014 में शुरू हुआ मिशन इंद्रधनुष अब तक अपने विभिन्न चरणों में 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण कर चुका है। जीरो-डोज बच्चों का प्रतिशत 2023 में 0.11% था, जो 2024 में घटकर 0.06% हो गया। अक्टूबर 2024 में शुरू यू-विन प्लेटफॉर्म के जरिए टीकाकरण रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। मार्च 2026 तक 11.87 करोड़ बच्चे और 3.96 करोड़ गर्भवती महिलाएं इसमें पंजीकृत हो चुकी थीं।

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ टीकाकरण अभियान

फरवरी 2026 में सरकार ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 14 वर्ष की 1.2 करोड़ लड़कियों को मुफ्त एचपीवी वैक्सीन देने के लिए तीन महीने का अभियान शुरू किया। 15 जुलाई 2026 तक देशभर में 52,10,302 लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन दी जा चुकी थी। इन प्रयासों के साथ मातृ मृत्यु दर 2014-16 में प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 130 से घटकर 2022-24 में 87 हो गई। नवजात मृत्यु दर 2015 में प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 28 से घटकर 2023 में 17 और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 48 से घटकर 28 हो गई।

टीबी और मलेरिया के खिलाफ प्रगति

सरकार के अनुसार, 2015-2024 के बीच भारत में हर साल सामने आने वाले टीबी के नए मामलों में 21% की कमी आई और टीबी से होने वाली मौतों में 28% की गिरावट दर्ज की गई। टीबी उपचार की सफलता दर 2021 में 83% से बढ़कर 2025 में 90% हो गई, जबकि उपचार कवरेज 2015 के 53% से बढ़कर 2024 में 92% हो गया। दिसंबर 2024 से चलाए जा रहे विशेष अभियानों के तहत 28.1 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, 20 लाख लोगों को निवारक उपचार दिया गया है और 5.7 लाख नए निक्षय मित्र जोड़े गए हैं। 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80.5% और मौतों में 78.38% की कमी आई। भारत 2024 में मलेरिया के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट’ समूह से बाहर निकल गया।

गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान

गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके तहत उच्च रक्तचाप के लिए 41.5 करोड़, मधुमेह के लिए 41.3 करोड़, मुंह के कैंसर के लिए 35.3 करोड़ और स्तन कैंसर के लिए 16.5 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत जून 2026 तक 1,856 केंद्रों पर 32.44 लाख मरीजों को मुफ्त डायलिसिस सुविधा दी गई। वहीं, तृतीयक कैंसर केयर सेंटर सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 19 राज्य कैंसर संस्थान और 20 तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र मंजूर किए गए हैं।

तंबाकू नियंत्रण अभियान को बढ़ावा

देशभर में 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 524 डे केयर कैंसर सेंटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6,410 एनसीडी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, 2009-10 से 2016-17 के बीच भारत में कुल तंबाकू इस्तेमाल में 17.3% की सापेक्ष कमी आई। तंबाकू-मुक्त पीढ़ी बनाने के लिए 2023 में टोबैको मुक्त युवा अभियान शुरू किया गया, जो अब तीसरे चरण में है। इस पहल के लिए भारत को तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में 2025 का ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज अवार्ड भी मिला है।

सस्ती दवाओं से इलाज का खर्च हुआ कम

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत जेनेरिक दवाओं को कम कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए जनऔषधि केंद्रों का नेटवर्क लगातार बढ़ाया गया है। फरवरी 2026 तक देश में 18,646 से अधिक जनऔषधि केंद्र हो चुके थे। यहां दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80% तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्रों पर 2,000 से अधिक दवाएं और 300 सर्जिकल उपकरण उपलब्ध हैं। 2015 में शुरू की गई अमृत फार्मेसी के माध्यम से जीवन रक्षक दवाओं पर 50-90% तक की छूट दी जाती है। इससे 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं और अब तक एमआरपी पर 17,000 करोड़ रुपए से अधिक की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे मरीजों की कुल बचत करीब 8,400 करोड़ रुपए रही है।

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की सुविधा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मुफ्त डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल के जरिए उपकेंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक विभिन्न जांच सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। उपकेंद्रों पर 14, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 63, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 97, सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में 111 और जिला अस्पतालों में 134 तरह की जांच उपलब्ध हैं।

टेलीमेडिसिन से घर के करीब पहुंची स्वास्थ्य सेवा

राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ई-संजीवनी के जरिए 11 अगस्त 2026 तक 49 करोड़ से अधिक परामर्श दिए जा चुके हैं। प्लेटफॉर्म पर 2.4 लाख से अधिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मौजूद हैं। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अक्टूबर 2022 में शुरू टेली-मानस सेवा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 भाषाओं में उपलब्ध है। 11 अगस्त 2026 तक 53 टेली-मानस सेल और 23 मेंटरिंग संस्थानों के जरिए 43.64 लाख कॉल प्राप्त हो चुकी थीं।

ड्रोन और एआई से स्वास्थ्य सेवाओं को नई तकनीक

2021 में शुरू आई-ड्रोन सेवा के जरिए दवाइयों और वैक्सीन की आपूर्ति दूरदराज के क्षेत्रों तक की जा रही है। 65 स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए 7,700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके 22,000 दवाइयां पहुंचाई गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। अप्रैल 2023 से नवंबर 2025 के बीच 28.2 करोड़ ई-संजीवनी कंसल्टेशन में एआई समर्थित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जिससे डॉक्टरों को रियल टाइम क्लिनिकल अलर्ट उपलब्ध हुए।

मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यबल का विस्तार

पिछले 12 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी से अधिक हुई है। एलोपैथी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 2025-26 तक 818 हो गई। 2014 से 12 नए एम्स शुरू किए गए हैं और देश में कुल एम्स की संख्या 23 हो गई है। 2025-26 तक एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 1,28,976 और पीजी सीटों की संख्या 85,822 हो गई। नर्सिंग क्षेत्र में 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, जिनसे हर साल करीब 15,700 नर्सिंग ग्रेजुएट तैयार होंगे। जून 2025 तक बीएससी नर्सिंग सीटें 53% बढ़कर 1,27,290 और एमएससी नर्सिंग सीटें 39% बढ़कर 14,986 हो गई थीं।

आयुष को भी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा गया

आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को भी जन स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल किया गया है। नवंबर 2014 में स्थापित आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। मई 2025 तक देश में 942 आयुष संस्थान थे। आयुष ग्रिड को पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवा के बीच डिजिटल सेतु के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के आयुष अस्पतालों और प्रयोगशालाओं को डिजिटल रूप से जोड़कर आयुष सेवाओं को अधिक सुलभ, एकीकृत और भविष्य के अनुरूप बनाना है। (इनपुट: पीआईबी)

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