रक्षा कूटनीति पर भारत का बड़ा रोडमैप, राजनाथ सिंह ने ‘रक्षा’ दस्तावेज का किया विमोचन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में रक्षा कूटनीति पर तैयार किए गए ‘रक्षा’ दस्तावेज का विमोचन किया। यह व्यापक दस्तावेज अगले 10 वर्षों के लिए भारत की वैश्विक रक्षा साझेदारियों के रणनीतिक रोडमैप और दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को सक्रिय वैश्विक सहयोग से जोड़ते हुए दीर्घकालिक स्थिरता, शांति और पारस्परिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा तय की गई है।

वैश्विक रक्षा साझेदारियों के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण

‘रक्षा’ दस्तावेज भारत की रक्षा कूटनीति में दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसका उद्देश्य बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की रक्षा साझेदारियों को अधिक प्रभावी बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर

दस्तावेज में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने को प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है। इसके तहत मित्र और साझेदार देशों के साथ रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने तथा साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण पर फोकस

क्षमता विकास को भी रक्षा कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया गया है। दस्तावेज में संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा मित्र देशों के साथ रक्षा क्षेत्र के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने की दिशा तय की गई है। इससे सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा

‘रक्षा’ दस्तावेज में स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और निर्यात को भी रणनीतिक प्राथमिकता दी गई है। भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफार्मों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देकर देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रक्षा उत्पादन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हिंद महासागर क्षेत्र में भूमिका मजबूत करने का लक्ष्य

समुद्री सुरक्षा को दस्तावेज के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया गया है। इसके तहत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में भूमिका को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को आगे बढ़ाने की दिशा तय की गई है।

रक्षा कूटनीति विदेश नीति का प्रमुख स्तंभ

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा कूटनीति भारत की विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ है। ऐसे में ‘रक्षा’ दस्तावेज अगले दशक के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना रहे।

शीर्ष सैन्य और रक्षा अधिकारी रहे मौजूद

दस्तावेज के विमोचन के अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) रुद्रेंद्र टंडन, वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर और चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह मौजूद रहे। रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। (इनपुट: पीआईबी)