Print

पोषण ट्रैकर से मजबूत हुई भारत की पोषण व्यवस्था, 8.93 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी जुड़े

 भारत में पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने और कुपोषण से लड़ने के लिए शुरू किया गया पोषण ट्रैकर डिजिटल तकनीक का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। यह प्लेटफॉर्म आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी, लाभार्थियों की जानकारी और पोषण कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद कर रहा है।

पोषण अभियान की शुरुआत 8 मार्च 2018 को की गई थी। इसका उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। बाद में बजट 2021-22 के तहत पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं और किशोरी बालिका योजना को मिलाकर मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 बनाया गया।

पोषण ट्रैकर को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मार्च 2021 में शुरू किया था। यह मोबाइल आधारित डिजिटल प्रणाली है, जिसके जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों की सेवाओं और लाभार्थियों की जानकारी लगभग वास्तविक समय में देखी जा सकती है।

इससे पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 11 अलग-अलग रजिस्टर रखने पड़ते थे, जिससे काम में अधिक समय लगता था। पोषण ट्रैकर आने के बाद जानकारी दर्ज करना, निगरानी करना और योजनाओं का लाभ पहुंचाना आसान हुआ है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों में कम वजन, कमजोर विकास और पोषण से जुड़ी अन्य समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे सरकार को समय पर जरूरी कदम उठाने में आसानी होती है।

पोषण ट्रैकर में आधार आधारित सत्यापन, डिजिटल होम विजिट सुविधा, बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री और पोषण कैलकुलेटर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

पोषण कैलकुलेटर के जरिए बच्चों की लंबाई, वजन, उम्र और अन्य जानकारी के आधार पर उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर की निगरानी की जाती है।

मई 2026 तक पोषण ट्रैकर देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर 8.93 करोड़ से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हो चुके हैं।

सरकार के अनुसार, मई 2026 तक 5.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत कम से कम 15 दिनों तक पोषण सहायता मिली। वहीं, 5.17 करोड़ लाभार्थियों को कम से कम 21 दिनों तक इसका लाभ मिला।

इसके अलावा, पोषण ट्रैकर के माध्यम से 0 से 5 साल तक के 6.3 करोड़ से अधिक बच्चों के विकास की निगरानी की गई है, जो पंजीकृत बच्चों का करीब 94 प्रतिशत है।

पोषण ट्रैकर को डिजिटल इंडिया की सफल पहल के रूप में देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने भी इसकी सराहना की है।

वर्ष 2024 में इसे ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (गोल्ड) मिला, जबकि अप्रैल 2025 में इसे लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सरकार का मानना है कि पोषण ट्रैकर तकनीक के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था बनाने और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

(इनपुटः पीआईबी)