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डिजिटल भुगतान में भारत की रफ्तार तेज, यूपीआई लेनदेन में 25% की बढ़ोतरी

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन में लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज की जा रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के अनुसार, अप्रैल में यूपीआई लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 22.35 अरब के पार पहुंच गई। वहीं, इन लेनदेन का कुल मूल्य 21 प्रतिशत बढ़कर 29.03 लाख करोड़ रुपए हो गया।

दैनिक लेनदेन में भी बढ़ोतरी दर्ज

अप्रैल में यूपीआई के दैनिक औसत लेनदेन की संख्या बढ़कर 74.5 करोड़ हो गई, जो मार्च में 73 करोड़ थी। इसी तरह, दैनिक औसत लेनदेन का मूल्य भी बढ़कर 96,766 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि मार्च में यह 95,243 करोड़ रुपए था। यह आंकड़े डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग को दर्शाते हैं।

आईएमपीएस में भी दिखी स्थिर वृद्धि

इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) के तहत अप्रैल में 36.2 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य 7.01 लाख करोड़ रुपए रहा। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। दैनिक आधार पर आईएमपीएस के औसतन 1.2 करोड़ लेनदेन हुए, जो सिस्टम की मजबूत उपयोगिता को दर्शाता है।

यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड

मार्च 2026 में यूपीआई ने 22.64 अरब लेनदेन के साथ अब तक का सबसे अधिक मासिक रिकॉर्ड दर्ज किया था, जो 2016 में लॉन्च होने के बाद से सबसे बड़ा आंकड़ा है।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही यूपीआई की पहुंच

यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है। इसकी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी से भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति मजबूत कर रहा है। साथ ही, यह प्रेषण (रेमिटेंस) बढ़ाने और वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करने में भी मदद कर रहा है।

एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि

वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की वृद्धि दर्ज की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी में एनपीसीआई द्वारा 11 अप्रैल 2016 को लॉन्च किया गया यूपीआई आज देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है।

छोटे आधार से वैश्विक स्तर तक पहुंच

वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई पर सिर्फ 2 करोड़ लेनदेन होते थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गया। इसी तरह, लेनदेन का कुल मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। (इनपुट-आईएएनएस)