भारत की शांति स्थापना ने दुनिया को दिखाया ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का रास्ता : सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने आज मंगलवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति मिशनों में भारत की लंबी भागीदारी हमारी सभ्यता की उस सोच को दर्शाती है जिसे हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी “संपूर्ण विश्व एक परिवार” के रूप में जानते हैं। उन्होंने यह बातें दिल्ली में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सैनिक योगदान देने वाले देशों (UN TCC) प्रमुखों के सम्मेलन 2025 के दौरान कहीं।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत की शांति स्थापना में भूमिका “विश्वबंधु” की भावना को दर्शाती है, यानी भारत सभी देशों का मित्र है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन उसी भावना को आगे बढ़ाता है, क्योंकि इसमें 32 सैनिक योगदान देने वाले देशों के नेता शामिल हुए हैं, जो दुनिया भर में तैनात लगभग दो-तिहाई संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को योगदान देते हैं।

सेना प्रमुख ने बताया कि भारत ने अब तक 71 संयुक्त राष्ट्र मिशनों में से 51 मिशनों में भाग लिया है और इसमें लगभग 3 लाख भारतीय सैनिकों ने सेवा दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने दृढ़ निश्चय और समर्पण के साथ सेवा की है, और भारत अपने अनुभवों को साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत के लिए इस सम्मेलन की मेजबानी करना एक सम्मान की बात है, क्योंकि यह वैश्विक शांति के इस पवित्र मिशन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत करता है। उन्होंने आधुनिक शांति स्थापना के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए कहा कि आज दुनिया में 56 से अधिक सक्रिय संघर्ष चल रहे हैं। इन संघर्षों में विघटनकारी तकनीकें, हाइब्रिड युद्ध और गैर-राज्यीय तत्वों की बढ़ती भूमिका जैसी नई चुनौतियां सामने हैं।

उन्होंने कहा कि आज का शांति सैनिक सिर्फ सुरक्षा देने वाला नहीं, बल्कि एक राजनयिक, तकनीकी विशेषज्ञ, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला व्यक्ति, और कई बार संघर्ष क्षेत्र में सूचना पहुंचाने का एकमात्र माध्यम भी होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि शांति मिशनों में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल, तेज तैनाती क्षमता और विभिन्न देशों के बीच बेहतर सामंजस्य को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए संयुक्त प्रशिक्षण और संसाधन प्रबंधन को और मजबूत बनाना जरूरी है।

जनरल द्विवेदी ने भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत न केवल अपने स्वदेशी उपकरण और तकनीकी समाधान साझा करने को तैयार है, बल्कि अन्य देशों की श्रेष्ठ प्रथाओं से सीखने के लिए भी तत्पर है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य है कि वैश्विक शांति और सहयोग के इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।-(IANS)