भारत का क्वांटम सुरक्षा मिशन तेज, टीडीबी और क्यूएनयू लैब्स में 150 करोड़ रुपए का समझौता

भारत की क्वांटम प्रौद्योगिकी और सुरक्षित संचार क्षमताओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने बेंगलुरु स्थित क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 150 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता के लिए समझौता किया है। यह सहायता अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) निधि के तहत दी जाएगी। 300 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली परियोजना का उद्देश्य भारत के क्वांटम-सुरक्षित एवं सेंसिंग नेटवर्क (आईक्यूएसएन) के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी तंत्र विकसित करना और संबंधित प्रौद्योगिकियों को टीआरएल-4/5 से बढ़ाकर टीआरएल-9 तक पहुंचाना है।

स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी तंत्र का विकास

परियोजना के तहत संप्रभु क्वांटम सुरक्षा और सेंसिंग प्रौद्योगिकियों के विकास, एकीकरण तथा सत्यापन पर ध्यान दिया जाएगा। इसका लक्ष्य ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करना है, जिन्हें अनुसंधान स्तर से आगे ले जाकर वास्तविक परिस्थितियों में तैनात किया जा सके। टीडीबी की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें निवेशक को परिपक्वता पर ऋण को कंपनी के शेयरों में बदलने या राशि नकद वापस लेने का विकल्प मिलता है।

चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित सुरक्षा ढांचा

डिजिटल अवसंरचना के बढ़ते परस्पर जुड़ाव के बीच उपकरणों की प्रामाणिकता, नौवहन प्रणालियों की अखंडता, विश्वसनीय समय समकालिकरण और संचार की गोपनीयता महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय प्राथमिकताएं बन गई हैं। क्यूएनयू लैब्स का प्रस्तावित कार्यक्रम पहचान सुरक्षा, स्थानिक अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय समकालिकरण के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इन सभी क्षमताओं को एकीकृत करके भारत के लिए संप्रभु सुरक्षा एवं सेंसिंग अवसंरचना का आधार तैयार करने की परिकल्पना की गई है।

हार्डवेयर स्तर पर उपकरणों की पहचान सुरक्षित करने पर जोर

पहचान सुरक्षा के तहत क्वांटम-सुरक्षित भौतिक रूप से क्लोन न की जा सकने वाली कार्यप्रणालियों और क्वांटम-सुरक्षित विश्वसनीय प्लेटफॉर्म मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे। इनका इस्तेमाल हार्डवेयर आधारित उपकरण पहचान, प्रमाणीकरण और क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा। इन प्रौद्योगिकियों का उद्देश्य उपकरणों के स्तर पर भरोसा मजबूत करना तथा उनकी पहचान में छेड़छाड़ या उसकी प्रतिकृति तैयार करने से जुड़ी कमजोरियों को कम करना है।

क्वांटम सेंसिंग से सुरक्षित नौवहन

स्थानिक अखंडता से जुड़े स्तंभ के तहत विश्वसनीय नौवहन और स्थिति निर्धारण प्रणालियों को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम में स्थिति निर्धारण प्रणालियों के साथ छेड़छाड़ और स्पूफिंग प्रयासों का पता लगाने वाली तकनीकों का विकास किया जाएगा। इसके तहत विद्युतचुंबकीय छेड़छाड़ का पता लगाने और जीपीएस के बिना नौवहन क्षमता विकसित करने के लिए कॉम्पैक्ट क्वांटम मैग्नेटोमीटर जैसी तकनीकों पर काम होगा। इनका इस्तेमाल रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण मिशन संबंधी प्रणालियों में किया जा सकता है।

क्यूकेडी से क्वांटम-सुरक्षित संचार

नेटवर्क सुरक्षा के तहत चिप आधारित क्वांटम कुंजी वितरण (क्यूकेडी), उपग्रह आधारित क्यूकेडी, क्वांटम-सुरक्षित संचार मॉड्यूल और एन्क्रिप्शन प्रणालियों जैसी सहायक तकनीकों के जरिए क्वांटम-सुरक्षित संचार पारितंत्र विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थलीय और लंबी दूरी के नेटवर्क पर सुरक्षित संचार के लिए तैनाती योग्य क्षमताएं तैयार करना है। इससे भविष्य में महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क को क्वांटम आधारित सुरक्षा खतरों से बचाने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

परमाणु घड़ियों से सुरक्षित समय समकालिकरण

चौथा स्तंभ उच्च-सटीकता वाली स्वदेशी समय निर्धारण अवसंरचना पर केंद्रित है। इसमें परमाणु घड़ी प्रौद्योगिकी और क्यूकेडी प्रमाणित वितरण के जरिए सुरक्षित समय समकालिकरण विकसित करने की योजना है। दूरसंचार, वित्तीय प्रणालियों, महत्वपूर्ण अवसंरचना और रक्षा संबंधी अनुप्रयोगों के लिए विश्वसनीय और छेड़छाड़-रोधी समय निर्धारण महत्वपूर्ण है। चारों स्तंभ मिलकर उपकरणों की प्रामाणिकता, सुरक्षित संचार, विश्वसनीय नौवहन और छेड़छाड़-रोधी समय निर्धारण के लिए एकीकृत क्वांटम विश्वास ढांचा तैयार करने में योगदान देंगे।

अनुसंधान से तैनाती तक ले जाने पर जोर

परियोजना के तहत प्रौद्योगिकियों को उच्चतर प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों तक ले जाने के लिए अनुसंधान, इंजीनियरिंग परिष्करण, प्रणाली एकीकरण और सत्यापन पर काम किया जाएगा। टीआरएल-9 तक पहुंचने का अर्थ संबंधित तकनीकों को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में उपयोग और तैनाती के लिए तैयार करना है।

स्वदेशी क्षमता से तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकियां साइबर सुरक्षा, संचार, नौवहन और महत्वपूर्ण अवसंरचना से जुड़ी जटिल चुनौतियों के समाधान के नए रास्ते खोल रही हैं। उन्होंने कहा कि इन परस्पर संबद्ध क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता विकसित करना भारत की प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आरडीआई निधि के माध्यम से टीडीबी उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और परिपक्वता को समर्थन दे रहा है। ऐसी तकनीकों को अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग के स्तर से आगे बढ़ाकर एकीकृत और तैनाती योग्य प्रणालियों में बदलने के लिए निरंतर निवेश आवश्यक है।

रक्षा, दूरसंचार और वित्तीय क्षेत्र को मिलेगा लाभ

क्यूएनयू लैब्स के संस्थापक ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य में देशों की संचार, उपकरण, नौवहन और समय निर्धारण प्रणालियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि आरडीआई निधि के तहत टीडीबी का समर्थन कंपनी को क्वांटम सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम को गति देने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम उपकरण पहचान, स्थान की अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय समकालिकरण के चार परस्पर संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित है, ताकि हार्डवेयर स्तर से ही भरोसेमंद अवसंरचना विकसित की जा सके। कार्यक्रम में चिप आधारित और उपग्रह आधारित क्यूकेडी, क्वांटम सेंसिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी क्षमताओं को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य ऐसी स्वदेशी क्षमताएं विकसित करना है, जिन पर भारत के रक्षा, दूरसंचार, वित्तीय और महत्वपूर्ण अवसंरचना क्षेत्र भरोसा कर सकें। साथ ही, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और उद्योग के साथ सहयोग के जरिए देश के व्यापक क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। (इनपुट: पीआईबी)