भारतीय नौसेना में शुक्रवार को नया युद्धपोत ‘अंजदीप’ शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने इसे अत्यंत गर्व का क्षण बताया। यह स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नाकाम करने में सक्षम है।

पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस अत्याधुनिक पोत

युद्धपोत ‘अंजदीप’ को ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। यह पोत स्वदेशी अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है, जिसमें हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी शामिल है।

हथियारों और तकनीक से मजबूत युद्ध क्षमता

यह भारतीय युद्धपोत हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है। चेन्नई में आयोजित समारोह में इसे नौसेना में शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 में लगभग 15 और पोत शामिल करने की योजना है।

200 से अधिक पोतों वाली नौसेना का लक्ष्य

वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना का लक्ष्य 200 से अधिक पोतों वाली नौसेना बनना है। इसके लिए वर्तमान में 50 पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्मित हो रहे हैं। वर्ष 2047 तक पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति के निर्माण का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

तटीय निगरानी और बचाव अभियानों में सक्षम

अंजदीप पनडुब्बी रोधी भूमिका के साथ-साथ तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और खोज एवं बचाव कार्यों में भी सक्षम है। 77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाले वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है, जो इसे 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्रदान करता है।

समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर जोर

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत सदैव एक समुद्री सभ्यता रहा है और आज देश की सुरक्षा व समृद्धि समुद्रों से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि हिंद महासागर क्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 1,20,000 जहाज गुजरते हैं, जो वैश्विक तेल, थोक माल और कंटेनर यातायात का बड़ा हिस्सा वहन करते हैं।

रणनीतिक चुनौतियों के बीच नौसेना की सक्रिय भूमिका

उन्होंने कहा कि समुद्र में छोटे व्यवधान भी बड़े रणनीतिक परिणाम ला सकते हैं। लाल सागर संकट और होर्मुज क्षेत्र में तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अक्टूबर 2023 से लाल सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती ने लगभग 400 व्यापारी जहाजों के सुरक्षित पारगमन को संभव बनाया है। (इनपुट: आईएएनएस)

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