प्रतिक्रिया | Tuesday, May 21, 2024

International Labor Day: जानें, श्रमिक दिवस की कब हुई शुरुआत, भारत में मजदूरों के अधिकारों के लिए क्या-क्या हो रही पहल

 
 
हर वर्ष दुनिया के कई देशों में 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस श्रमिकों के योगदान और श्रमिक आंदोलन का सम्मान करने का दिन है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर कई देशों में आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश होता है। हर वर्ष इस दिन मजदूरों के सम्मान में रैलियां, सभाएं तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 
 
भारत में श्रमिक
श्रमिकों को प्राथमिकता देते हुए 16 अक्टूबर 2014 पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि जितनी ताकत ‘सत्यमेव जयते’ की है उतनी ही ताकत राष्ट्र के विकास के लिए ‘श्रमेव जयते’ की भी है। देश में पिछले कुछ वर्षों में श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण के  लिए तमाम योजनाएं शुरू की गई हैं।
श्रमिकों को पोर्टेबिलिटी की सुविधा वाला यूनिवर्सल अकाउंट नंबर दिया गया ताकि उसकी भविष्य निधि की राशि कहीं भी सुरक्षित तरीके से निकल सके I इसके अलावा इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाते हुए निरीक्षक की भूमिका को श्रमिकों को सलाह और मार्गदर्शन देने वाली भी बनाई गईI इसके अलावा, श्रम सुविधा के पोर्टल के जरिए उद्योगों को भी सहज रिटर्न की व्यवस्था दी गई। सरकार ने साफ कर दिया था कि, नजरिया अगर सम्मानजनक हो तो श्रमिक ‘श्रम योगी, राष्ट्र योगी और राष्ट्रनिर्माता’ बन जाते हैं। 
 
 
–ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने की प्रमुख पहलों में से एक है। पोर्टल पर कुल 28.93 करोड़ असंगठित श्रमिकों ने 400 से अधिक व्यवसायों में पंजीकरण कराया है। इसमें और व्यवसाय जोड़े जायेंगे। ई-श्रम पोर्टल एनसीएस और स्किल इंडिया पोर्टल (एसआईपी) के साथ भी एकीकृत है।
 
 
–रोजगार से संबंधित विभिन्न सेवाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्‍ध कराने के लिए 2015 में नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) की शुरुआत की गई। 31 मई 2023 तक एनसीएस प्लेटफॉर्म पर नौकरी की तलाश में जुटे 3.20 करोड़ लोग पंजीकृत है, 11.25 लाख सक्रिय नियोक्ता हैं और 6.42 लाख सक्रिय रिक्तियां हैं। इसकी शुरुआत के बाद से 1.39 करोड़ से अधिक रिक्तियां जुटाई गई हैं। इसे ई-श्रम, उद्यम और स्किल इंडिया पोर्टल (एसआईपी) के साथ जोड़ा गया है।
 
 
–श्रम कानूनों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाते हुए, अनुपालन को सुगम बनाते हुए और लेनदेन की लागत को कम करके प्रभावी, कुशल और वास्तविक समय शासन को बढ़ावा देने के लिए श्रम सुविधा पोर्टल (एसएसपी) 16 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ किया गया। यह डीपीआईआईटी के नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम पोर्टल (एनएसडब्ल्यूएस) के साथ भी एकीकृत है, यह निवेशकों को एनएसडब्ल्यूएस पर सिंगल साइन-ऑन पर श्रम कानूनों के तहत लाइसेंस और पंजीकरण के लिए आवेदन करने में सक्षम बनाता है।
 
 
–श्रम संहिताओं के तहत गैर-अपराधीकरण,मातृत्व लाभ, नौकरी की तलाश में जुटे एससी व एसटी लोगों के लिए कल्याण और बीड़ी/सिने/गैर-कोयला खदान श्रमिकों के लिए श्रम कल्याण योजना जैसे विभिन्न नीतिगत सुधारों को भी रेखांकित किया। इसके अलावा दो जीवित बच्चों के लिए अधिसूचित सवैतनिक मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह और दो से अधिक बच्चों के लिए 12 सप्ताह कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कमीशनिंग/गोद लेने वाली माताओं को पहली बार 12 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलेगा।
 
 
–कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम (ईएसआईसी) में बदलाव हुए हैं। ईएसआई योजना के अंतर्गत शामिल जिलों की संख्या वर्ष 2014 में 393 से बढ़कर वर्तमान में 611 हो चुकी है।
 
 
अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस का इतिहास
अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस की अलग-अलग देशों में अलग-अलग मूल कहानियां हैं। हालांकि सभी देशों की कहानियों का जनक  शोषण के खिलाफ खड़ा श्रमिक वर्ग ही रहा है। 
 
 
अमेरिका के श्रमिक आन्दोलन को किया जाता है याद
श्रम दिवस के आने से पहले विश्व स्तर पर मजदूर वर्ग के लिए मृत्यु, चोटों और खतरनाक कामकाजी परिस्थितियां बहुत आम थीं। औद्योगीकरण के उदय के समय, 19 वीं शताब्दी के दौरान अमेरिका ने मजदूरों का शोषण किया और कठोर परिस्थितियों में उनसे दिन में 15 घंटे काम कराया। उद्योगों में कर्मचारियों की बढ़ती मौत ने श्रमिक वर्ग को अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए मजबूर किया। श्रमिकों और समाजवादियों द्वारा किए गए प्रयासों के बाद, अमेरिकन फेडरेशन ऑफ लेबर द्वारा 19 वीं शताब्दी के अंत में शिकागो में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में श्रमिकों के काम करने के लिए आठ घंटे का कानूनी समय घोषित किया गया था। 
 
 
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन: श्रमिकों के अधिकारों का रक्षक 
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की है। यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रिपक्षीय संस्था है जिसका उद्देश्य मानवाधिकारों एवं श्रमिक अधिकारों को बढ़ावा देना है। इसका कार्य श्रम मानक निर्धारित करना, नीतियां बनाना  एवं सभी महिलाओं तथा पुरुषों के लिये सभ्य कार्य को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम तैयार करना है। इसके 187 सदस्य देश हैं तथा इसका मुख्यालय जिनेवा में है। वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। 
 
 
भारत में चेन्नई से हुई थी शुरुआत 
 
भारत में पहला श्रम दिवस 1 मई 1923 को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा चेन्नई में मनाया गया था। पार्टी के नेता, सिंगारवेलु चेट्टियार ने दो स्थानों पर ’मई दिवस’ समारोह का आयोजन किया था – एक मद्रास उच्च न्यायालय के सामने वाले समुद्र तट पर और दूसरा त्रिपलीकेन समुद्र तट पर। यह पहली बार था जब भारत में श्रम दिवस के प्रतीक के रूप में लाल झंडे  का इस्तेमाल किया गया था। यह दिन श्रमिक आंदोलनों से जुड़ा हुआ है। मजदूर दिवस को हिंदी में  ‘कामगर दिन’, मराठी में ‘कामगर दिवस’ और तमिल में ‘उझाईपलर नाल’ के नाम से भी जाना जाता है।
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आखरी अपडेट: 21st May 2024