जयशंकर ने अरब लीग के राजनयिकों से की मुलाकात, वैश्विक बदलाव में तकनीक की भूमिका पर दिया जो

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को यहां सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में प्रशिक्षण ले रहे अरब लीग के राजनयिकों के एक समूह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मौजूदा संघर्षों के व्यापक प्रभाव और आज की दुनिया को आकार देने में तकनीक की परिवर्तनकारी भूमिका पर चर्चा की।

जयशंकर ने राजनयिकों से बातचीत के दौरान उन्हें भारत में अपने प्रवास का उपयोग देश और यहां के लोगों को बेहतर ढंग से समझने के लिए करने के लिए प्रोत्साहित किया।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अरब लीग के राजनयिकों से मुलाकात के दौरान मौजूदा संघर्षों के दूरगामी प्रभावों और आज की दुनिया को आकार देने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि पड़ोसी और ग्लोबल साउथ के साझेदार होने के नाते भारत और अरब देशों के बीच घनिष्ठ आर्थिक सहयोग जरूरी है। इससे महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और अनुचित दबाव या लाभ उठाने की कोशिशों को निष्प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

जयशंकर ने राजनयिकों को भारत में अपने समय का उपयोग देश और उसके लोगों के बारे में अपनी समझ को गहरा करने के लिए करने की सलाह दी। उन्होंने उनके प्रशिक्षण और प्रवास के सफल एवं समृद्ध अनुभव की कामना भी की।

इससे पहले अगस्त में विदेश मंत्रालय में कांसुलर, पासपोर्ट एवं वीजा तथा प्रवासी भारतीय मामलों की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने अरब लीग के सहायक महासचिव खालिद मंजलावी से मुलाकात की थी। इस बैठक में दूसरे भारत-अरब विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में अपनाए गए कार्यकारी कार्यक्रम 2026-28 को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

भारत के अरब लीग के सदस्य देशों के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। अरब लीग को ‘लीग ऑफ अरब स्टेट्स’ भी कहा जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1945 में काहिरा में सात सदस्य देशों के साथ हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के साझा हितों को बढ़ावा देना था। वर्तमान में इस संगठन में अरब जगत के 22 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें उत्तरी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देश भी हैं।

मिस्र स्थित भारतीय दूतावास के एक बयान के अनुसार, अरब लीग के देश भारत के विस्तारित पड़ोस का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र के साथ संबंधों को गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर साझा विचार और मजबूत आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध भारत-अरब संबंधों की बुनियाद हैं।

-(इनपुटः आईएएनएस)