जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक स्वामित्व और ग्रामीण पेयजल सेवाओं की स्थिरता को मजबूत करने के लिए गुरुवार को जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद का 13वां संस्करण आयोजित किया गया। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस संवाद में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, तमिलनाडु, ओडिशा और झारखंड के पांच जिलों ने ग्रामीण पेयजल प्रबंधन से जुड़ी अपनी नवोन्मेषी पहल और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं।
जिला प्रशासन की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना ने संवाद की अध्यक्षता की। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मिशन निदेशक इसमें शामिल हुए। अशोक के.के. मीना ने कहा कि यह संवाद जिला प्रशासनों को अपने अनुभव साझा करने, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान तलाशने और ग्रामीण पेयजल सेवाओं को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने स्थानीय जल प्रशासन मजबूत करने, जल आपूर्ति योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव और निर्मित परिसंपत्तियों के सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देने में जिला कलेक्टरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
नियमित समीक्षा और जवाबदेही पर जोर
सचिव ने जिला जल एवं स्वच्छता मिशनों (डीडब्ल्यूएसएम) की नियमित मासिक बैठकें आयोजित करने और उनका विवरण समय पर पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थागत निगरानी और उचित दस्तावेजीकरण जरूरी है। उन्होंने जिलों से जल सेवा आकलन के तहत उपलब्ध कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्टों और जिला सुधार योजनाओं की नियमित समीक्षा करने को भी कहा। उनके अनुसार, जल गुणवत्ता और बिजली आपूर्ति में व्यवधान कई क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए, ताकि उनकी विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता बढ़ाई जा सके।
डेटा आधारित योजना और जल स्रोतों की स्थिरता
अशोक के.के. मीना ने भूजल, वर्षा, जल विज्ञान और जल जीवन मिशन के आंकड़ों को एकीकृत करने वाली निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने जिलों को इस प्रणाली के माध्यम से जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान करने, स्रोत स्थिरता योजनाएं तैयार करने और आवश्यक उपायों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण, जल स्रोतों के संरक्षण और जल संचयन के लिए वीबी-जी राम जी सहित अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई।
जल अर्पण के माध्यम से हस्तांतरण प्रक्रिया होगी मजबूत
सचिव ने कहा कि पेयजल आपूर्ति योजनाओं को जल अर्पण के माध्यम से औपचारिक रूप से हस्तांतरित करने के बाद जिलों को संबंधित स्थानीय भाषाओं में प्रमाणपत्रों का उचित रिकॉर्ड रखना चाहिए। इससे ग्राम पंचायतों और समुदायों को योजनाओं की जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी), पंचायत सचिवों और सुजलम शक्ति समूहों के व्यवस्थित प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।
छात्रों को जल अवसंरचना से परिचित कराने की पहल
कमल किशोर सोआन ने जिला प्रशासनों से निर्णय सहायता प्रणाली का अधिक उपयोग करने और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में स्रोत स्थिरता की योजना को मजबूत बनाने का आग्रह किया। उन्होंने बहु-ग्राम जल आपूर्ति योजनाओं, जल उपचार संयंत्रों, प्रयोगशालाओं और एससीएडीए आधारित प्रणालियों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देने के लिए शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने का सुझाव भी दिया। इसका उद्देश्य युवाओं में जल अवसंरचना, जल संरक्षण और पेयजल प्रबंधन के प्रति समझ विकसित करना है।
जल अर्पण मॉड्यूल पर दी गई प्रस्तुति
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के निदेशक वाई.के. सिंह ने जल अर्पण मॉड्यूल पर प्रस्तुति दी। उन्होंने ग्राम पंचायतों और समुदायों को पेयजल आपूर्ति योजनाओं के औपचारिक शुभारंभ और हस्तांतरण की प्रक्रिया में इस मॉड्यूल की भूमिका समझाई। उन्होंने जल अर्पण की तैयारी के प्रमुख चरणों, डीटीयू और डीडब्ल्यूएसएसएम डैशबोर्ड के माध्यम से रिपोर्टिंग एवं निगरानी तथा ग्राम पंचायत डैशबोर्ड पर जल अर्पण और हर घर जल प्रमाणीकरण की डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही, ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से रिपोर्टिंग और प्रमाणन की चरणबद्ध प्रक्रिया भी समझाई।
कानपुर नगर: तकनीक और सामुदायिक निगरानी पर जोर
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर महेंद्र सिंह तंवर ने नियमित समीक्षा बैठकों, विभागीय समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के जरिए पेयजल सेवाओं को मजबूत बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। जिले में स्कूलों, खेल क्लबों और सोशल मीडिया के माध्यम से जल संरक्षण, जल गुणवत्ता और पेयजल अवसंरचना के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवक फील्ड टेस्ट किट के जरिए जल गुणवत्ता की जांच में योगदान दे रही हैं। इसके साथ ही प्रयोगशाला परीक्षण और गुणवत्ता ऑडिट भी किए जा रहे हैं। कानपुर नगर में एससीएडीए आधारित निगरानी प्रणालियों, डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म और जल सारथी एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। पेयजल परिसंपत्तियों की जीआईएस आधारित मैपिंग के जरिए अवसंरचना प्रबंधन और योजना निर्माण को बेहतर बनाने के प्रयास भी जारी हैं।
पश्चिम त्रिपुरा: सामुदायिक स्वामित्व और जल संरक्षण
त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर डॉ. विशाल कुमार ने ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पेयजल प्रणालियों के स्वामित्व और स्थिरता को मजबूत बनाने की पहल साझा की। जिले में उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह बढ़ाने और ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक ऑडिट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जल उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए जल संग्रहण, वनरोपण, छतों पर वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक जल स्रोत मानचित्रण, ग्राम जल सुरक्षा योजनाओं और अन्य विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
तंजावुर: जल बजट और स्मार्ट निगरानी प्रणाली
तमिलनाडु के तंजावुर जिले की कलेक्टर आर. रेवती ने वैज्ञानिक योजना और तकनीक आधारित उपायों के जरिए पेयजल सुरक्षा मजबूत करने की जानकारी दी। जिले में ग्राम स्तर पर जल बजट तैयार किया जा रहा है, ताकि वर्तमान और भविष्य की जल मांग का आकलन किया जा सके तथा भूजल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान कर पुनर्भरण और संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी जा सके। इस प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और स्थानीय हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। जिले में भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, जल निकायों के पुनरुद्धार और सूक्ष्म सिंचाई को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल आपूर्ति की निगरानी के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित वास्तविक समय निगरानी प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और स्मार्ट प्रवाह निगरानी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जल गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कम लागत वाली जल कीटाणुशोधन प्रणालियां भी शुरू की गई हैं।
बरगढ़ा: परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए तीन चरणों की व्यवस्था
ओडिशा के बरगढ़ा जिले के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर आदित्य गोयल ने ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए अपनाई गई तीन चरणों वाली व्यवस्था की जानकारी दी। इसमें परियोजना निष्पादन, चालू करना तथा संचालन एवं रखरखाव शामिल हैं। भूमि, बिजली आपूर्ति, वन मंजूरी और मार्गाधिकार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया गया है। मासिक समीक्षा, नियमित क्षेत्र निरीक्षण और शिकायत निवारण व्यवस्था के जरिए रिसाव, अनधिकृत कनेक्शन तथा खराब अवसंरचना की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जिले ने आईआईएम संबलपुर को चौबीसों घंटे पाइप से जल आपूर्ति उपलब्ध कराने सहित बड़ी बहु-ग्राम जल आपूर्ति योजनाओं के अनुभव भी साझा किए। इन प्रयासों में प्रभावी परियोजना प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और निरंतर निगरानी की भूमिका को रेखांकित किया गया।
पलामू: निगरानी और उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह पर ध्यान
झारखंड के पलामू जिले के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने पेयजल योजनाओं की निगरानी के लिए नियमित समीक्षा बैठकों, जिला नियंत्रण कक्ष और शिकायत निवारण प्रणालियों की भूमिका बताई। जिले में ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और सामुदायिक संस्थाओं को जल आपूर्ति परिसंपत्तियों के संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए मनरेगा तथा अन्य कार्यक्रमों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। आईओटी आधारित प्रणालियां जल आपूर्ति योजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी में मदद कर रही हैं। जल सहियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य सहियों के सहयोग से सामुदायिक जल गुणवत्ता निगरानी भी की जा रही है। जिले ने उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह को मजबूत करने और पेयजल अवसंरचना के टिकाऊ संचालन एवं रखरखाव के लिए अपने जलकर भुगतान अभियान की जानकारी भी साझा की।
अन्य जिलों के लिए उपयोगी साबित होंगी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां
संवाद में प्रस्तुतियों के माध्यम से जल जीवन मिशन के तहत हासिल उपलब्धियों, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों और जमीनी स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को सामने रखा गया। इन अनुभवों से अन्य जिलों को ग्रामीण पेयजल सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और हर घर जल के लक्ष्य की दिशा में प्रगति तेज करने में मदद मिल सकती है। (इनपुट: पीआईबी)


