जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) से एक बड़ी ‘तिरंगा रैली’ को हरी झंडी दिखाई। यह रैली देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत आयोजित की गई।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने तिरंगे के लिए दी गई अनगिनत कुर्बानियों का किया जिक्र
रैली के मौके पर उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की राष्ट्रीय ध्वज के प्रति निष्ठा का इतिहास बहुत पुराना है और यह हाल के राजनीतिक बदलावों से भी पहले का है। उन्होंने कहा, “यह तिरंगा हाल ही में फहराना शुरू नहीं हुआ है। यह आजादी के बाद से—15 अगस्त 1947 से लेकर आज तक—लगातार आसमान में लहरा रहा है। भारत की यही खूबसूरती है कि यहां के लोगों ने हमेशा इस तिरंगे के लिए कुर्बानियां दी हैं।”
चौधरी ने लोगों से अपील की कि क्षेत्र की देशभक्ति को सिर्फ अनुच्छेद 370 हटाने के नजरिए से न देखा जाए। उन्होंने कहा, “असल बात यह है कि 5 अगस्त 2019 से पहले भी यह जश्न उसी जोश के साथ मनाया जाता था और आज भी उसी जोश से मनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं, इसलिए इसे सिर्फ 5 अगस्त 2019 की घटनाओं से न जोड़ा जाए। चाहे सीमा पर हो, कश्मीर घाटी के अंदर हो या जम्मू में—लोगों ने इस तिरंगे को ऊंचा रखने के लिए अनगिनत कुर्बानियां दी हैं।”
वक्फ बोर्ड चेयरपर्सन: बदलाव का प्रतीक बनी तिरंगा रैलियां
रैली की सराहना करते हुए जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने मौजूदा माहौल को उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ते बदलाव के रूप में बताया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में और 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में जो तिरंगा रैलियां शुरू हुई हैं, यह एक ऐसा कदम है जो हमें अंधेरे दौर से उजाले की ओर ले जा रहा है। तिरंगे का मान-सम्मान हमेशा से रहा है, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक—बच्चों और बुजुर्गों—में यह झंडा सिर्फ इमारतों पर नहीं, बल्कि युवाओं की आंखों और दिलों में भी लहरा रहा है।”
उन्होंने घाटी के सामाजिक ताने-बाने में आए बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि पहले के दशकों में राष्ट्रीय गर्व का ऐसा प्रदर्शन कम देखने को मिलता था। “आज हम जिस खुशी और एकजुटता का अनुभव कर रहे हैं, वह पिछले 35 सालों से कश्मीर में कहीं खो गई थी। बच्चों के हाथों में तिरंगा देखना पहले शायद ही कभी होता था। आज हर किसी के दिल में खुशी है और देश के साथ मिलकर आगे बढ़ने की भावना है।”‘
हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा
श्रीनगर की सड़कों से निकली यह रैली देशव्यापी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा है। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को भारत की आजादी के 80वें वर्ष के मौके पर अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत इस अभियान की शुरुआत की थी। इसका मकसद नागरिकों को तिरंगे से व्यक्तिगत जुड़ाव बनाने, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
इस साल का फोकस: वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ
इस साल के उत्सव में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभियान के तहत जिलों, ब्लॉकों और पंचायतों में कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ‘हर घर तिरंगा 2026’ की प्रमुख गतिविधियों में तिरंगा रैलियां और जुलूस, प्रदर्शनियां, तिरंगा कॉन्सर्ट, बाइक व साइकिल रैलियां, महत्वपूर्ण स्थानों पर तिरंगे के रंगों वाली लाइटिंग, सजावट और रंगोली कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा ‘तिरंगा सैल्यूट टू द स्पिरिट ऑफ वंदे मातरम’ थीम पर विशेष कार्यक्रम और लोकप्रिय ‘सेल्फी विद तिरंगा’ पहल भी चलाई जाएगी। (इनपुट-एजेंसी)


