काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आए छात्र समूह का दूसरा दिन अयोध्या में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक एकता का सशक्त प्रतीक बन गया। आज सुबह 9 बजे विशेष बस से जब छात्र श्री राम मंदिर धाम पहुँचे, तो पूरे परिसर में “जय श्री राम” की गूंज ने वातावरण को उत्सवमय कर दिया। तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों के उत्साह और आनंद से पूरा धाम आलोकित प्रतीत हो रहा था।
छात्रों ने भगवान श्री रामलला के प्रथम दिव्य दर्शन किए, जिनसे वे भाव-विभोर हो उठे। दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से आए इन विद्यार्थियों ने पूर्ण अनुशासन और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की। यह क्षण उत्तर और दक्षिण भारत की भक्ति परंपराओं के अद्भुत संगम का प्रतीक बन गया।
दर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने भव्य राम दरबार का अवलोकन किया, जहाँ भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्ट कलात्मकता को नजदीक से देखने का अवसर मिला। इसके उपरांत छात्र हनुमान गढ़ी पहुँचे और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा तथा भक्तिमय वातावरण ने उनकी यात्रा को और पवित्र बना दिया।
इसके बाद छात्र समूह ने ऐतिहासिक राम की पैड़ी का भ्रमण किया। शांत और पवित्र सरयू नदी के तट पर विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया। सरयू की हल्की तरंगों ने सभी के मन को शांति और दिव्यता से भर दिया।
अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही। पहली बार उन्हें उत्तर भारत की आस्था, परंपरा और भक्ति की विराट संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से देखने-सुनने का अवसर मिला। छात्रों के अनुसार, अयोध्या का यह दिव्य अनुभव उनकी स्मृतियों में जीवनभर के लिए अमिट छाप छोड़ गया।
काशी तमिल संगमम् 4.0 का यह कार्यक्रम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूती से पोषित कर रहा है। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक साझेदारी और परंपरागत संबंधों को सुदृढ़ करते हुए, यह पहल नई पीढ़ी को देश की महान विरासत और सांस्कृतिक एकता से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
(इनपुट- PIB)


