केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 15 सितंबर 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित एक वर्चुअल बैठक के दौरान ‘स्वच्छ सेवा आकलन’ (एसएसए) का शुभारंभ किया। इस बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना भी उपस्थित थे। ग्रामीण स्वच्छता के प्रभारी मंत्री, संबंधित अधिकारी और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मिशन निदेशक भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
ग्राम पंचायत स्तर पर होगा वार्षिक डिजिटल स्व-मूल्यांकन
‘स्वच्छ सेवा आकलन’ पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2.0 के अंतर्गत विकसित एक वार्षिक, ग्राम पंचायत स्तरीय डिजिटल स्व-मूल्यांकन ढांचा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाओं के वितरण का आकलन और निगरानी करना है। इस बहुस्तरीय मूल्यांकन ढांचे में जमीनी स्तर पर स्वच्छता सेवाओं के वितरण को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) तथा जिला एवं राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर के अधिकारियों की भागीदारी की परिकल्पना की गई है।
ओडीएफ प्लस गांवों में स्वच्छता सेवाओं का आकलन
एसएसए के तहत ओडीएफ प्लस (मॉडल) घोषित ग्राम पंचायतें अपनी वीडब्ल्यूएससी और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत में ओडीएफ की स्थिरता, दृश्य स्वच्छता और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) की स्थिति का आकलन करेंगी। आकलन के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक एसएलडब्ल्यूएम संसाधनों की कार्यक्षमता तथा संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) की स्थिति का भी स्व-मूल्यांकन किया जाएगा।
ग्राम सभा करेगी निष्कर्षों का सत्यापन
स्व-मूल्यांकन से सामने आए निष्कर्षों पर संबंधित ग्राम सभा द्वारा चर्चा और सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ये निष्कर्ष जिला एवं राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों को डीडब्ल्यूएसएम/एसडब्ल्यूएसएम बैठकों में समीक्षा के लिए उपलब्ध होंगे। अधिकारी सेवा वितरण में कमियों की पहचान कर सकेंगे और जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई के लिए अपनी-अपनी सुधार योजनाएं तैयार कर सकेंगे।
ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को मिलेगा सशक्त मंच
73वें संविधान संशोधन अधिनियम की भावना के अनुरूप, ‘स्वच्छ सेवा आकलन’ ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को अपनी उपलब्धियों और प्रगति की समीक्षा करने तथा उनमें सुधार के लिए केंद्रित प्रयास करने में और अधिक सशक्त बनाने में मदद करेगा। इससे ग्रामीण स्वच्छता सेवाओं के वितरण में सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी सहायता मिलेगी। (इनपुट: पीआईबी)


