दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत विकसित लोक ऑपरेटिंग सिस्टम (लोकओएस) एक वेब और मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके महासंघों का आद्यांत डिजिटलीकरण करना है। डीएवाई-एनआरएलएम केंद्र सरकार का प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम है, जो निर्धन ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार, कौशल आधारित रोजगार और संवहनीय आजीविका को बढ़ावा देता है। लोकओएस सदस्यों के रिकॉर्ड, बचत, ऋण, पुनर्भुगतान, वित्तीय लेनदेन, आजीविका और विभिन्न अभिसरण पहलों का डिजिटल प्रबंधन कर एसएचजी और समुदाय आधारित संगठनों के लिए व्यापक डिजिटल समाधान उपलब्ध कराता है।
पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन को मिली मजबूती
लोकओएस के माध्यम से कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम हुई है और स्वयं सहायता समूहों के वित्तीय लेनदेन की वास्तविक समय में निगरानी संभव हुई है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार आया है। यह प्लेटफॉर्म एसएचजी नेटवर्क के भीतर हर वर्ष लगभग 2,00,000 करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड दर्ज करता है। इसका वेब एप्लीकेशन प्रशासकों, ई-लेखाकारों और स्वीकृति अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है, जबकि मोबाइल एप्लीकेशन जमीनी स्तर पर समुदाय आधारित संगठनों की गतिविधियों के रिकॉर्ड और प्रबंधन को आसान बनाता है।
शी-लीप्स से ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा
लोकओएस के अंतर्गत 29 जून, 2026 को ‘सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर-लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर प्रॉस्परिटी एंड सस्टेनेबिलिटी’ (शी-लीप्स) की शुरुआत की गई। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उद्यम स्थापित करने, व्यवसाय संचालन की निगरानी और प्रबंधन के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से कृषि और गैर-कृषि दोनों प्रकार के उद्यमों को बढ़ावा देकर संवहनीय और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
लोकओएस की प्रमुख डिजिटल विशेषताएं
लोकओएस मोबाइल ऐप स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, क्लस्टर स्तरीय संघों और उनके सदस्यों का डिजिटल पंजीकरण एवं प्रबंधन करता है। यह आधार और बैंक खाते से जुड़ी विशिष्ट डिजिटल पहचान उपलब्ध कराता है तथा बचत, ऋण, पुनर्भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखता है। इसके अलावा आजीविका संबंधी डेटा का संधारण, सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण, भूमिका आधारित प्रशासन, ग्राम स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक निगरानी तथा वास्तविक समय के डैशबोर्ड और एक क्लिक पर रिपोर्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।
देशभर में तेजी से बढ़ा लोकओएस का विस्तार
लोकओएस ने पूरे देश में सामुदायिक संस्थानों के डिजिटल रूपांतरण को नई गति दी है। वर्तमान में यह 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 762 जिलों, 7,241 ब्लॉकों, 2.57 लाख ग्राम पंचायतों और 5.92 लाख गांवों तक पहुंच चुका है। यह प्लेटफॉर्म सभी स्तरों पर कार्यक्रमों के एकीकृत क्रियान्वयन, निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बना रहा है।
94 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह जुड़े
लोकओएस के माध्यम से देशभर में 34,314 क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ), 5.62 लाख ग्राम संगठन (वीओ), 94.16 लाख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और 10.03 करोड़ एसएचजी सदस्य डिजिटल रूप से जुड़े हैं। इस व्यापक डिजिटल एकीकरण से सामुदायिक संस्थानों के संचालन और निगरानी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
हजारों करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की निगरानी
लोकओएस सामुदायिक संस्थानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता की प्रभावी निगरानी भी करता है। इसके तहत रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) में 9,718.41 करोड़ रुपए, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) में 64,607.66 करोड़ रुपए और कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड (सीईएफ) में 38.34 करोड़ रुपए की सहायता का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
‘लखपति दीदी’ पहल को भी मिल रहा डिजिटल सहयोग
लोकओएस ‘लखपति दीदी’ पहल के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह लाभार्थियों की ट्रैकिंग, डिजिटल निगरानी और बड़े स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करता है। वर्तमान में इसके माध्यम से 6,611 मास्टर ट्रेनर्स, 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (सीआरपी) और 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों (पीएलडी) का नेटवर्क संचालित हो रहा है। साथ ही प्लेटफॉर्म 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टरों (डीएआर) का भी रखरखाव कर रहा है, जो आजीविका योजना, निगरानी और कार्यान्वयन का मजबूत डिजिटल आधार बन चुके हैं।
डिजिटल ग्रामीण भारत के निर्माण में निभा रहा अहम भूमिका
लोकओएस डीएवाई-एनआरएलएम के तहत समुदाय आधारित संगठनों के आद्यांत डिजिटलीकरण का एक परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। यह वास्तविक समय की निगरानी, डिजिटल वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत कर रहा है। साथ ही ‘लखपति दीदी’ जैसी पहलों को गति देकर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


