शहरी निकायों को अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि शहरी निकाय लोकतंत्र की बुनियाद हैं और जनता से सीधे जुड़े होते हैं। उन्हें संवाद और आदर्श प्रथाओं के जरिए अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। सदन नियमित चले, मुद्दों पर चर्चा हो, जवाबदेही सुनिश्चित हो, यही लोकतंत्र की सच्ची परंपरा है, जिसे हमें विकसित करना होगा।

गुरुग्राम के मानेसर में शहरी निकायों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को किया संबोधित

ओम बिरला गुरुग्राम के मानेसर में शहरी निकायों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती और जवाबदेह शासन के लिए शहरी स्थानीय निकायों को संवाद और आदर्श आचरण के जरिए सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निकाय प्रतिनिधि जनता से सीधा संवाद करते हैं और समस्या व संकट की सबसे पहली जानकारी इन्हें मिलती है। ऐसे में संवाद से इनका समाधान निकल सकता है। इसी सोच से संसद की संरक्षक की भूमिका को समझते हुए श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने की यह पहल की गई है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को उच्च स्तर पर ले जाना सभी की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उच्च स्तर पर ले जाना सभी की जिम्मेदारी है। शहरी क्षेत्रों में एक उत्तरदायी और पारदर्शी निकाय प्रणाली विकसित होनी चाहिए। सदन में प्रश्नोत्तर हों, मुद्दों पर चर्चा हो, बैठकें नियमित चलें—यह परंपरा विकसित की जानी चाहिए। साथ ही इन निकायों में जनहितधारकों जैसे बुद्धिजीवी वर्ग, पर्यावरणविद को नीतिगत प्रक्रिया और बजट निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए।

निकायों में समितियां बनें और संसद की तरह कार्य करें

उन्होंने कहा कि निकायों में समितियां बनें और संसद की तरह कार्य करें। उन्होंने उल्लेख किया कि 18वीं लोकसभा में सकारात्मक परिवर्तन आया है और सभी दलों ने सदन को चलाने की दिशा में सहयोग दिखाया है। अब रुकावट डालने वाले स्वयं समाज के प्रति उत्तरदायी होंगे। हमें यह सोचकर भी कार्य करना चाहिए कि भविष्य में राजनीतिक नेतृत्व शहरी निकायों से ही निकलेगा।

शहरी निकायों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, राष्ट्र उतना ही मजबूत बनेगा

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि शहरी निकायों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, राष्ट्र उतना ही मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम निकाय एक विकास मॉडल है जिसे वर्ष 2050 तक 75 लाख की आबादी के लिए तैयार किया जा रहा है। निकायों को पारदर्शी और आधुनिक बनाना ज़रूरी है। स्मार्ट सिटी, स्वच्छता और पर्यावरण को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रधानमंत्री का विजन है कि शहर स्लम मुक्त हों।

पहली बार शहरी निकायों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन किया जा रहा आयोजित 

सम्मेलन की जानकारी देते हुए लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि इस आयोजन की प्रेरणा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिली। उनका मानना है कि संसद को अन्य निकायों का संरक्षक बनना चाहिए। यह पहली बार है जब शहरी निकायों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। 

सम्मेलन के होंगे दूरगामी परिणाम 

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य यह समझाना है कि शहरी निकाय राष्ट्र निर्माण में कैसे भूमिका निभा सकते हैं। यह अवसर है कि निकाय अपनी जिम्मेदारी को समझें और जनता की जरूरत के अनुसार काम करें। इस सम्मेलन के दूरगामी परिणाम होंगे और हरियाणा में इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यह दो दिवसीय सम्मेलन 3 से 4 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के सभापति भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में शहरीकरण, महिला सशक्तीकरण, विकसित भारत 2047 में योगदान, पारदर्शिता और निकाय शासन के पांच उप विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।

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