18/06/26 | 12:10 pm | JAKs | PMBJP

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जन औषधि योजना की बड़ी सफलता, 12 साल में 19,200 के पार पहुंचे केंद्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) देश की सबसे प्रभावी स्वास्थ्य पहलों में से एक बनकर उभरी है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2014 में देशभर में केवल 84 जन औषधि केंद्र (JAKs) संचालित थे, जबकि 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 19,200 से अधिक हो गई है। इस विस्तार ने लाखों नागरिकों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की है।

यह योजना दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों तक भी पहुंची है। पूर्वोत्तर राज्यों में 2014 में जहां केवल एक जन औषधि केंद्र था, वहीं 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 417 हो गई है।

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश 4,042 जन औषधि केंद्रों के साथ देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद केरल (1,791), कर्नाटक (1,665), तमिलनाडु (1,591), बिहार (1,183), पश्चिम बंगाल (937), गुजरात (918), ओडिशा (852), महाराष्ट्र (741) और राजस्थान (718) का स्थान है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जन औषधि केंद्रों की संख्या 2014 के 4 केंद्रों से बढ़कर 2026 में 645 हो गई है। जम्मू-कश्मीर में यह संख्या 6 से बढ़कर 358, पंजाब में 20 से 556, हिमाचल प्रदेश में 8 से 76 और त्रिपुरा में 1 से बढ़कर 33 हो गई है।

मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता से नागरिकों ने अब तक स्वास्थ्य खर्च में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है।

घरेलू दवा और चिकित्सा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने वर्ष 2020-21 में फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की थी।

फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना के तहत अब तक 42,694.89 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है। इससे 3.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हुई और 1.13 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

वहीं मेडिकल डिवाइस निर्माण को बढ़ावा देने वाली पीएलआई योजना के तहत 1,136.23 करोड़ रुपये का निवेश आया है और 29,402.93 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। इस योजना से 6,822 लोगों को रोजगार मिला है और देश में महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिला है।

सरकार ने बल्क ड्रग्स के घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में तीन बल्क ड्रग पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिससे भारत की मेडटेक और फार्मा आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।

-(इनपुटःएजेंसी)