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अप्रैल माह में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची : रिपोर्ट

भारत की विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) गतिविधि अप्रैल में तेजी से बढ़ी है और यह पिछले 10 महीनों के सबसे उच्चतम स्तर 58.2 पर पहुंच गई है। मार्च में यह आंकड़ा 58.1 था। यह जानकारी एचएसबीसी इंडिया द्वारा आज शुक्रवार को जारी एक सर्वेक्षण में दी गई। यह बढ़त घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि के कारण देखी गई है। पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) में 50 से ऊपर का आंकड़ा विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार (growth) को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का मतलब होता है कि क्षेत्र में संकुचन (contraction) हो रहा है।

सर्वे में कहा गया है कि अप्रैल में नई अंतरराष्ट्रीय मांग पिछले 14 वर्षों में दूसरी सबसे अधिक रही, अगर जनवरी को छोड़ दिया जाए। यह 2025-26 वित्तीय वर्ष की शुरुआत में हुआ। एचएसबीसी इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने बताया कि अप्रैल में निर्यात ऑर्डर बढ़ने से संकेत मिलते हैं कि वैश्विक व्यापार में बदलाव और अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों के चलते कंपनियां भारत में उत्पादन की ओर शिफ्ट कर सकती हैं।

उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों ने सबसे तेज ग्रोथ दिखाई। नई मांग में तेज वृद्धि के चलते उत्पादन बढ़ा। उत्पादन में यह तेजी पिछले 10 महीनों की सबसे ज्यादा है। हालांकि इनपुट कीमतें थोड़ी तेजी से बढ़ीं, लेकिन आउटपुट (बिक्री) की कीमतें इससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ीं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। आउटपुट कीमतों में यह उछाल अक्टूबर 2013 के बाद सबसे ज्यादा है।

वहीं अप्रैल में रोजगार के मोर्चे पर भी अच्छी खबर रही। उत्पादन मांग बढ़ने के कारण कंपनियों ने नई भर्तियां कीं। करीब 9% प्रतिभागी कंपनियों ने स्थायी और अस्थायी अनुबंधों के तहत नए कर्मचारियों को काम पर रखा। मूल्यवृद्धि यानी महंगाई के मामले में इनपुट लागत में पिछले चार महीनों की सबसे तेज वृद्धि हुई, जबकि आउटपुट महंगाई 11 साल से भी ज्यादा समय में सबसे ऊंचे स्तर पर रही। कंपनियों ने यह लागत ग्राहकों पर डाल दी।

सर्वे के मुताबिक कारोबारी आत्मविश्वास में भी अप्रैल में बढ़ोतरी हुई। कंपनियां आने वाले साल में मजबूत मांग की उम्मीद कर रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।-(IANS)

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