प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सभी की शाश्वत समृद्धि, सुख और खुशहाली की कामना करते हुए संस्कृत का एक सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की असीम कृपा, सूर्य देव की ऊर्जा और वर्षा का पावन आशीर्वाद मानव जीवन को सुख-सौभाग्य से समृद्ध बनाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी कामना है कि धरती सदैव हरी-भरी, जीवंत और समृद्ध बनी रहे।
एक्स पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रकृति की असीम कृपा, सूर्यदेव की ऊर्जा और वर्षा का पावन आशीर्वाद हम सभी के जीवन को सुख-सौभाग्य से समृद्ध करता है। मेरी कामना है कि धरती पर सदैव हरियाली और खुशहाली बनी रहे।”
संस्कृत श्लोक के जरिए कल्याण की कामना
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का सुभाषितम् भी साझा किया:- “शं नो देवः सविता त्रायमाणः शं नो भवन्तूषसो विभातीः। शं नः पर्जन्यो भवतु प्रजाभ्यः शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः॥”
जन कल्याण और हरियाली के लिए प्रार्थना
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषितम् का अर्थ बताते हुए कहा कि विश्व के तेजस्वी रक्षक सविता देव हम पर कृपा करें। उज्ज्वल सूर्योदय हमारे जीवन में सुख और समृद्धि लाए। वर्षा के देवता पर्जन्य जन कल्याण की रक्षा करें और खेतों, फसलों तथा भूमि के कृपालु स्वामी सभी को सुख और समृद्धि प्रदान करें। उन्होंने इस संदेश के जरिए प्रकृति, कृषि और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। (इनपुट: पीआईबी)


