विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सफल BRICS शिखर सम्मेलन ने भारत की मजबूत आयोजन क्षमता और गहरे भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देशों के बीच आम सहमति बनाने की उसकी क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने सम्मेलन के सफल होने पर सवाल उठाए थे, लेकिन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सफलतापूर्वक आयोजित हुआ।
32 प्रतिनिधिमंडलों ने लिया हिस्सा
जयशंकर ने बताया कि शिखर सम्मेलन में 32 प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। इनमें 11 BRICS सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों, चार क्षेत्रीय संगठनों और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। कई देशों का प्रतिनिधित्व उनके राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों ने किया। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी शामिल थे।
मध्य पूर्व संघर्ष पर बनी आम सहमति
दुनियाभर में जारी तनाव के बीच सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि BRICS पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के संघर्ष पर आम सहमति बनाने में सफल रहा। सदस्य देशों ने शांति, सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक समझ की अपील की। साथ ही निर्बाध वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा प्रवाह जारी रखने तथा नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया।
नेताओं के बीच खुली बातचीत का माहौल
विदेश मंत्री ने कहा कि सम्मेलन ने नेताओं के बीच खुली और सहज बातचीत का माहौल भी तैयार किया। उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे नेताओं के बीच भी संवाद का अवसर बना, जो संभवत: अलग परिस्थितियों में कभी एक-दूसरे से नहीं मिल पाते।
आर्थिक विकास और ग्लोबल साउथ पर फोकस
जयशंकर के अनुसार, सम्मेलन का व्यापक एजेंडा आर्थिक विकास, तकनीक और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि सुधार और लचीलापन ऐसे प्रमुख विषय बनकर उभरे, जिन्होंने BRICS के सदस्य देशों को आम सहमति बनाने में मदद की।
आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने BRICS की आम सहमति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समूह ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की निंदा की, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य बताते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और इससे निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज करने की समूह की अपील पर भी जोर दिया।
‘बातचीत, कूटनीति और विकास’ का संदेश
जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बातचीत, कूटनीति और विकास’ के संदेश की झलक दिखाई दी, जिसकी दुनिया भर में सराहना हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से विभिन्न मतभेदों के बीच साझा आधार तलाशने का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सफल हुआ सम्मेलन
अपनी बात समाप्त करते हुए जयशंकर ने कहा कि कई लोगों ने पहले भविष्यवाणी की थी कि BRICS शिखर सम्मेलन सफल नहीं हो पाएगा, लेकिन यह सफल हुआ। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को सफलतापूर्वक आयोजित कर अपनी कूटनीतिक और आयोजन क्षमता का प्रदर्शन किया। (इनपुट: आईएएनएस)


