भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता: एक साल का सफर, विदेश मंत्रालय ने पेश की संवाद से सहयोग तक की झलक

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पिछले एक साल में संवाद, सहभागिता और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले इस पूरी यात्रा की एक झलक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

मंत्रालय के अनुसार, भारत की अध्यक्षता ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को केंद्र में रखकर संवाद और सहभागिता का एक पूरा वर्ष पूरा किया है। ये चार स्तंभ ही भारत की ब्रिक्स प्राथमिकताओं को परिभाषित करते हैं। इनके जरिए सदस्य देशों ने साझा चुनौतियों पर चर्चा की, आपसी सहयोग बढ़ाया और विकास के नए अवसर तलाशे।

वीडियो में दिखी भारत की अध्यक्षता की पूरी तस्वीर

एमईए ने एक विशेष वीडियो भी जारी किया, जिसमें वर्ष भर की गतिविधियों और पहलों को संक्षेप में पेश किया गया। क्लिप की शुरुआत इस संदेश से होती है — “भविष्य पहले से तय नहीं होता, हम इसे खुद गढ़ते हैं।” इसमें अनिश्चित समय में भी संवाद के माध्यम से समस्याएं सुलझाने की शक्ति पर जोर दिया गया है, जो एकजुटता और सामूहिक प्रयास से पैदा होती है।

वीडियो में दो दशक पहले शुरू हुई ब्रिक्स की आकांक्षा को आज के मजबूत रिश्तों में बदलते दिखाया गया है। शुरू में चार देशों का यह समूह अब 11 देशों का विस्तारित मंच बन चुका है। भारत चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है। 

चार स्तंभों पर आधारित भारत की प्राथमिकताएं

भारत की अध्यक्षता में इन चार स्तंभों को साफ तौर पर जोड़ा गया है: 

– लचीलापन — वैश्विक संकटों से निपटने की क्षमता 
– नवाचार — तकनीक और नए समाधान 
– सहयोग — सदस्य देशों के बीच साझेदारी 
– स्थिरता — दीर्घकालिक और समावेशी विकास

अब तक सदस्य देशों के 30 शहरों में ब्रिक्स की 400 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। भारत में इस जिम्मेदारी को किसी एक राज्य ने नहीं, बल्कि कई राज्यों ने अलग-अलग समय पर उठाया है। 

कमल प्रतीक चिन्ह की व्याख्या

वीडियो में कमल आकार के प्रतीक चिन्ह को भी परिभाषित किया गया। पहला स्तंभ जमीन से जुड़कर लचीलापन बनाए रखता है, जिसमें जोखिम का पता चलते ही तुरंत कार्रवाई होती है। दूसरा स्तंभ नवाचार पर केंद्रित है, जहां स्टार्टअप फंड और नए आइडिया को बढ़ावा दिया जाता है। तीसरा स्तंभ सहयोग पर जोर देता है, ताकि ग्लोबल साउथ की आवाज सिर्फ सुनी न जाए, बल्कि वह नेतृत्व भी करे। चौथा स्तंभ स्थिरता और सतत विकास की ओर ले जाता है, जिसमें ग्रीन और क्लीन एनर्जी पर फोकस है।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और विकासशील देशों के साझा हितों को प्रमुखता देने पर विशेष जोर दिया। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना समूह की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। यह वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संवाद को ठोस आकार देने और सहयोग की नई दिशा तय करने का रहा। (इनपुट-एजेंसी)