प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल का लिखा एक लेख साझा किया है। जिसमें जल-सुरक्षित भविष्य प्राप्त करने के लिए भारत के व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
पीएम मोदी के हवाले से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने केंद्रीय मंत्री पाटिल का लेख साझा करते हुए सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, “जल सुरक्षा एक साझा ज़िम्मेदारी है, जिसके लिए मज़बूत सिस्टम, वैज्ञानिक समाधान और जन-भागीदारी की ज़रूरत है। केंद्रीय मंत्री श्री @CRPaatil ने जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, जल संरक्षण और टेक्नोलॉजी-आधारित समाधानों के ज़रिए जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन बनाने की भारत की कोशिशों के बारे में लिखा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह एक बहुत ही जानकारीपूर्ण नजरिया है कि कैसे लोगों की भागीदारी और राज्यों व समुदायों की लगातार कोशिशें भविष्य की पीढ़ियों के लिए टिकाऊ तरीके से पानी सुरक्षित करने में मदद कर सकती हैं।
वहीं, एक एक्स अन्य पोस्ट में सी. आर. पाटिल ने लिखा कि जल एक साझा संसाधन है और इसलिए जल सुरक्षा हमारी साझी जिम्मेदारी भी है। जल का स्वभाव ही ऐसा है कि वह सीमाओं से बंधकर नहीं रहता। नदियां एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक बहती हैं,विभिन्न समुदायों को जोड़ती हैं। और वर्षा की अधिकता या कमी दूर-दराज क्षेत्रों में बाढ़ या सूखे का कारण बनती है। इसी कारण जल प्रबंधन को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि एक समग्र दृष्टिकोण से देखना चाहिए। यही भावना इस इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक में भी है। इस वर्ष का विषय है ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट वॉटर मैनेजमेंट’।
उन्होंने आगे कहा कि आज इसकी जरूरत पहले से अधिक है। क्लाइमेट चेंज के कारण जल चक्र तेज़ी से बदल रहा है। कहीं बहुत ज्यादा बारिश भी हो रही है, कहीं बहुत कम, और कई बार बारिश उस समय नहीं होती जहां जल की आवश्यकता होती है। हिमालयी क्षेत्र की हाल की घटनाएं और वर्ष 2023 में सिक्किम की आपदा हमें यह दिखाती है कि बदलती जलवायु के साथ जोखिम भी बदल रहे हैं।
पाटिल ने कहा कि हमें बेहतर विज्ञान, मजबूत मॉनिटरिंग, समय पर अर्ली वार्निंग और बेहतर तैयारी की जरूरत है। सबसे जरूरी है एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना और मिलकर काम करना।


