कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने देश के 19 प्रतिष्ठित संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई-स्किल्स) के रूप में औपचारिक मान्यता प्रदान की है। नई दिल्ली स्थित कौशल भवन में आयोजित समारोह में मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने इन संस्थानों को मान्यता प्रमाणपत्र प्रदान किए। यह मान्यता 9 अक्टूबर 2026 से 8 अक्टूबर 2029 तक प्रभावी रहेगी। इस पहल का उद्देश्य देश में उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करना है।
ग्रीन चैनल के माध्यम से हुआ संस्थानों का पैनलबद्धीकरण
इन 19 संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों के पैनलबद्धीकरण संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत ग्रीन चैनल व्यवस्था के माध्यम से शामिल किया गया है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, पीएम-सेतु के तहत उन्नत किए गए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) तथा केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों द्वारा संचालित या पैनलबद्ध कौशल उत्कृष्टता केंद्रों को त्वरित मान्यता प्रदान करने का मार्ग उपलब्ध कराती है। इस व्यवस्था के तहत पात्र संस्थानों को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करनी होती है। इसके बाद उनके आवेदन नामांकन या नियमित मूल्यांकन प्रक्रिया के बिना सीधे कार्यकारी समिति के समक्ष विचार के लिए रखे जाते हैं। इसका उद्देश्य सुव्यवस्थित अनुमोदन प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिष्ठित और उच्च गुणवत्ता वाले संस्थानों का तेजी से पैनलबद्धीकरण करना है।
जयंत चौधरी ने जुलाई में जारी किए थे दिशा-निर्देश
इन दिशा-निर्देशों का अनावरण 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित कौशल भवन में विश्व युवा कौशल दिवस समारोह के दौरान कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने किया था। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य आधुनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और उद्योग जगत के साथ मजबूत साझेदारी से युक्त स्थायी एवं उन्नत प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। इसके तहत उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
उच्च गुणवत्ता वाले कौशल प्रशिक्षण का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार होगा
इस अवसर पर एमएसडीई की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि 19 संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में पैनलबद्ध करना स्थायी, उन्नत और उद्योगों की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी कौशल विकास संस्थानों का विश्वसनीय राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है, जो अपनी क्षेत्रगत विशेषज्ञता और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए पहचाने जाते हैं। इसका उद्देश्य कौशल विकास के परिणामों को बेहतर बनाने के साथ युवाओं के बीच कौशल प्रशिक्षण को एक आकर्षक और आकांक्षापूर्ण विकल्प बनाना है। मुखर्जी ने कहा कि ये केंद्र उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण देने, प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं को सहयोग प्रदान करने, उद्योग जगत के साथ संबंध मजबूत करने तथा शिक्षार्थियों के परिणामों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंत्रालय इन संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि देश के सभी क्षेत्रों में उन्नत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
प्रशिक्षण से लेकर करियर परामर्श तक मिलेंगी सुविधाएं
कौशल उत्कृष्टता केंद्रों की परिकल्पना स्थायी, उन्नत और क्षेत्र विशेष पर केंद्रित प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में की गई है। इनका उद्देश्य उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला और परिणामोन्मुख कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। ये केंद्र उन्नत एवं प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण, मूल्यांकन, मार्गदर्शन और करियर परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगे। इसके अलावा प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं को प्रशिक्षण देने, उद्योगों के साथ साझेदारी विकसित करने तथा प्रशिक्षण के बाद शिक्षार्थियों के प्रदर्शन और रोजगार संबंधी परिणामों की निगरानी करने में भी इनकी भूमिका होगी। इनका पैनलबद्धीकरण किसी एक विशेष योजना तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका उद्देश्य संस्थानों के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव स्थापित करना और उनकी मौजूदा अवसंरचना, उपकरणों, प्रशिक्षकों, मूल्यांकनकर्ताओं तथा संस्थागत क्षमताओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं में भी होगा उपयोग
मंत्रालय की ओर से दी गई मान्यता राष्ट्रीय कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में इन संस्थानों की क्षमताओं की औपचारिक स्वीकृति है। पैनलबद्ध कौशल उत्कृष्टता केंद्रों का उपयोग एमएसडीई, अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग जगत, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों और अन्य हितधारकों की कौशल विकास संबंधी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए संबंधित कार्यक्रमों के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। मंत्रालय के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले संस्थानों और क्षेत्र विशेष के उत्कृष्ट केंद्रों को एक साझा राष्ट्रीय ढांचे के तहत लाने से प्रशिक्षण क्षमता मजबूत होगी। साथ ही संस्थागत विशेषज्ञता का व्यापक आदान-प्रदान संभव होगा और देशभर में उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विश्वसनीय एवं परिणामोन्मुख कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इन 19 संस्थानों को मिली कौशल उत्कृष्टता केंद्रों की मान्यता
मान्यता प्राप्त 19 संस्थानों को उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में शामिल किया गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र
1. जलविद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड।
2. राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान, गुरुग्राम, हरियाणा।
3. राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, चेन्नई, तमिलनाडु।
4. राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, कायथार, तमिलनाडु।
5. सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा संस्थान, कपूरथला, पंजाब।
रसायन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र
6. सीआईपीईटी: सीएसटीएस, गुवाहाटी, असम।
7. सीआईपीईटी: सीएसटीएस, संभाजीनगर, महाराष्ट्र।
8. सीआईपीईटी: आईपीटी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
9. सीआईपीईटी: आईपीटी, कोच्चि, केरल।
10. सीआईपीईटी: सीएसटीएस, भुवनेश्वर, ओडिशा।
निर्माण क्षेत्र
11. भारतीय रेल सिविल इंजीनियरिंग संस्थान, पुणे, महाराष्ट्र।
बहु-क्षेत्रीय संस्थान
12. राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संस्थान, वास्को-द-गामा, गोवा।
13. संत शिरोमणि रविदास वैश्विक कौशल पार्क, भोपाल, मध्य प्रदेश।
14. विश्व कौशल केंद्र, भुवनेश्वर, ओडिशा।
15. उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान, पुणे, महाराष्ट्र।
लौह एवं इस्पात क्षेत्र
16. राष्ट्रीय द्वितीयक इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान, फतेहगढ़ साहिब, पंजाब।
समुद्री इंजीनियरिंग क्षेत्र
17. आईएनएस शिवाजी प्रीमियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर मरीन इंजीनियर्स ऑफ द इंडियन नेवी, पुणे, महाराष्ट्र।
पर्यटन एवं आतिथेय क्षेत्र
18. इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रिशन, भुवनेश्वर, ओडिशा।
कृषि क्षेत्र
19. राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद, तेलंगाना। (इनपुट: पीआईबी)


