‘नशामुक्ति मित्र’ बनेंगे बदलाव की ताकत, सरकार ने पंचायतों को सौंपी अहम जिम्मेदारी

केंद्र सरकार नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत देशभर में नशे के खिलाफ जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका बढ़ा रही है। अभियान के तहत पंचायत संसाधन व्यक्तियों को ‘नशामुक्ति मित्र’ के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, ताकि गांवों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और नशा मुक्त समाज के निर्माण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

राज्यसभा में सरकार ने दी जानकारी

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान के माध्यम से नशाखोरी के खिलाफ जमीनी स्तर पर व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य स्थानीय समुदायों, स्वयंसेवकों और पंचायतों को जोड़कर नशे के खिलाफ जन-आंदोलन तैयार करना है।

पंचायत संसाधन व्यक्ति बन रहे ‘नशामुक्ति मित्र’

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने की कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के तहत पंचायती राज संस्थाओं को सीधे जोड़ने के लिए अलग से कोई योजना नहीं बनाई गई है। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज विभागों से पंचायत संसाधन व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें ‘नशामुक्ति मित्र’ (एनएमएम) के रूप में नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है। इन नशामुक्ति मित्रों का दायित्व गांवों में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना, लोगों को अभियान से जोड़ना और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियान पर विशेष जोर

सरकार के अनुसार, नशामुक्ति मित्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से नशा मुक्त भारत अभियान की सामूहिक प्रतिज्ञा को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। साथ ही, एनएमबीए के लोगो, शुभंकर और राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।

राज्यों को दी जा रही वित्तीय सहायता

बी.एल. वर्मा ने बताया कि एनएपीडीडीआर योजना के राज्य कार्य योजना (एसएपी) घटक के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निवारक शिक्षा, जन-जागरूकता, क्षमता निर्माण और मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान हिमाचल प्रदेश को इस मद में कोई धनराशि जारी नहीं की गई थी। हालांकि, वर्ष 2025-26 में राज्य कार्य योजना के तहत विभिन्न गतिविधियों के संचालन के लिए हिमाचल प्रदेश को 1.34 करोड़ रुपए जारी किए गए।

जनभागीदारी से नशा मुक्त भारत का लक्ष्य

सरकार का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों की सक्रिय भागीदारी से नशा मुक्त भारत अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सतत जागरूकता पैदा करना और जनसहभागिता के माध्यम से नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करना है। (इनपुट: पीआईबी)