पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों द्वारा जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स के पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत नई दिल्ली में की है। 13 से 16 जुलाई 2026 तक चलने वाले चार दिवसीय आवासीय कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षकों का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो ग्राम पंचायतों को तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर जल सुरक्षा योजनाएं बनाने में सहयोग देगा। इस अवसर पर मंत्रालय ने ‘जल-पर्याप्त पंचायत’ प्रशिक्षण नियमावली (चरण-1 और चरण-2) भी जारी की।
जल-पर्याप्त ग्राम पंचायतों के विजन को मिलेगा बल
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य जल बजट के माध्यम से ग्राम पंचायतों की क्षमता बढ़ाना है, ताकि वे सहभागी, वैज्ञानिक और जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजनाएं तैयार कर सकें। यह कार्यक्रम ‘जल-पर्याप्त ग्राम पंचायतों’ के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जल सुरक्षा सतत ग्रामीण विकास का आधार : विवेक भारद्वाज
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि जल सुरक्षा सतत ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के पास जल संबंधी चुनौतियों की गहरी समझ होती है और यह प्रशिक्षण उस स्थानीय ज्ञान को जल बजट के माध्यम से व्यवस्थित कार्ययोजना में बदलने में मदद करेगा। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को इस पहल की सफलता के लिए आवश्यक बताया।
जीपीडीपी से जोड़ी जाएंगी जल सुरक्षा योजनाएं
मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) में जल संरक्षण को शामिल करना समग्र ग्रामीण विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम राज्यों, जिलों और ग्राम पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में सहयोग देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स का पूल तैयार करेगा। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जल संकट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जल बजट तैयार करने, स्थानीय जल संसाधनों और मांग का आकलन, संरक्षण उपायों की पहचान, जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के साथ एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास, मूल्यांकन और चरणवार क्षमता निर्माण की व्यवस्था भी की गई है।
पहले चरण में 10 राज्यों की 1,000 पंचायतें होंगी शामिल
इस पहल के पहले चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के 100 जिलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा। पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिभागी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो बाद में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। (इनपुट: पीआईबी)


